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छोटे रॉकेट से प्रक्षेपण बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाएगी इसरो

फिलहाल इसरो के पास 98 0 करोड़ के प्रक्षेपण आर्डर, 500 से 6 00 करोड़ के आर्डर पाइपलाइन में

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बेंगलूरु. अंतरिक्ष कार्यक्रमों में विकसित देशों जैसी तकनीकी क्षमता हासिल करने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय उपग्रह कारोबार में एक फीसदी से भी कम हिस्सेदारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) व उसकी वाणिज्यिक इकाई अंतरिक्ष कॉरपोरेशन लिमिटेड के लिए निराशाजनक है। हालांकि, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों की रूप-रेखा देश और समाज हित को ध्यान में रखकर तैयार की गई है लेकिन अंतरिक्ष कॉरपोरेशन अब अंतरिक्ष के बड़े वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना पर चल रहा है। इसके लिए लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) का पूर्ण वाणिज्यिकरण किया जाएगा।
अंतरिक्ष कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राकेश शशिभूषण ने बताया कि फिलहाल इसरो के पास 98 0 करोड़ रुपए के आर्डर हैं। ये आर्डर सिर्फ उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए है। वहीं अंतरिक्ष लिमिटेड जल्दी ही विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण लिए 500 से 6 00 करोड़ रुपए का प्रक्षेपण करार करेगा। प्रक्षेपण सेवाओं के लिए ये आर्डर पाइपलाइन में है। उन्होंने कहा कि इसरो के कार्यक्रमों में सामाजिक हितों और देश की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाती है। आम नागरिक और रक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए इसरो अपनी क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल करता है। वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए बेहद सीमित तौर पर पीएसएलवी की सेवा उपलब्ध रहती है। इसलिए प्रमुख वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति होने के बावजूद उपग्रह कारोबार में इसरो की हिस्सेदारी काफी कम है। कुछ क्षेत्रों में हमारी हिस्सेदारी 10 फीसदी से कम तो कहीं 1 फीसदी से भी कम है। जब तक निजी क्षेत्र इसमें प्रमुख भागीदारी नहीं निभाएगा तब तक इसमें बढ़ोतरी नहीं होगी और आय नहीं बढ़ेगी।
उन्होंने बताया कि भले ही इसरो के कार्यक्रम वाणिज्यिक उद्देश्यों को ध्यान में रखकर तय नहीं किए गए हैं लेकिन अब एसएसएलवी का विकास वाणिज्यिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए ही किया जा रहा है। एसएसएलवी इसरो का पहला रॉकेट है जिसका विकास वाणिज्यिक लांंच के लिए किया जा रहा है। इस रॉकेट के निर्माण की जिम्मेदारी पूरी तरह निजी क्षेत्र के हाथों में होगी। एसएसएलवी के विकास के बाद अंतरिक्ष लिमिटेड बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक करार कर पाएगा और उम्मीद है कि इससे वैश्विक अंतरिक्ष कारोबार में भारत की हिस्सेादीर भी बढ़ेगी। हर साल 50 से 6 0 एसएसएलवी लांचिंग का लक्ष्य है जिससे डेढ़ से दो हजार करोड़ रुपए तक की आय होगी। इस रॉकेट को कम लागत में और काफी कम समय में लांचिंग के लिए तैयार किया जा सकेगा।