कर्नाटक प्रति लाख आबादी पर 16,360 लोगों की आरटी-पीसीआर जांच कर रहा है।
बेंगलूरु. कोरोना वायरस संक्रमण (Corona Virus Infection) की पुष्टि के लिए सबसे भरोसेमंद आरटी-पीसीआर जांच में कर्नाटक ने अन्य राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। कर्नाटक प्रति लाख आबादी पर 16,360 लोगों की आरटी-पीसीआर जांच कर रहा है। तमिलनाडु में यह 13,591 और केरल में 894 प्रति लाख आबादी ही है। महाराष्ट्र में प्रति लाख आबादी पर 2,976 नमूनों की आरटी-पीसीआर जांच हो रही है जबकि प्रति लाख आबादी पर 221 आरटी-पीसीआर जांच के साथ तेलंगाना सबसे पीछे है।
प्रदेश कोविड वॉर रूम के प्रमुख मुनीश मौदगिल ने प्रदेश में कोविड नियंत्रण कार्यक्रमों में आरटी-पीसीआर (RT-PCR) जांच पर निर्भरता को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। सामाजिक दूरी, मास्क और हाथों की स्वच्छता सहित आरटी-पीसीआर जांच दूसरी लहर से बचने में कारगर है। बीते कुछ माह में ज्यादा से ज्यादा जांच सहित कोविड नियंत्रण अन्य उपायों का लाभ घटते मामले और कम मृत्यु दर के रूप में मिल रहा है। इसे बरकार रखने की जरूरी है।
कोविड तकनीकी सलाहकार समिति के सदस्य व महामारी रोग विज्ञानी डॉ. गिरीधर आर. बाबू ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा आरटी-पीसीआर जांच के लिए केंद्र सरकार ने भी कर्नाटक को सराहा है। अब उपनगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।
आरटी-पीसीआर के अलावा लगभग सभी राज्य रैपिड एंटीजन जांच (Rapid Antigen Test) कर रहे हैं लेकिन अन्य राज्यों को भी चाहिए कि वे आरटी-पीसीआर को प्राथमिकता दें। रैपिड एंटीजन जांच की रिपोर्ट 30 मिनट में उपलब्ध हो जाती है और लागत भी कम है लेकिन आरटी-पीसीआर के मुकाबले यह कम भरोसेमंद है।