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फलों के राजा आम ने दी दस्तक

फलों के राजा आम ने शहर की मंडी में दस्तक दी है। सूखे के बावजूद आम के समय से पहले मंडी में आने से लोगों में खुशी छाई है।

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हुब्बल्ली. फलों के राजा आम ने शहर की मंडी में दस्तक दी है। सूखे के बावजूद आम के समय से पहले मंडी में आने से लोगों में खुशी छाई है। शहर के चन्नम्मा सर्किल के पास, जनता बाजार, दुर्गदबैल आदि जगहों पर आम की बिक्री आरम्भ हुई है। देवगढ़ का आपुस, धारवाड़ का कल्मी नस्ल के आम ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं। बाजार में एक दर्जन आम के 1200 रुपए से 16 00 रुपए के हिसाब से बिक रहे हैं। विभिन्न आवासीय क्षेत्रों में लगने वाली साप्ताहिक मंडियों में छोटे आकार के आम 300 से 400 रुपए प्रति दर्जन बिक रहे हैं।


अच्छी पैदावार की उम्मीद
बागबानी विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ तालुकों में फूल अधिक छूटे थे। साथ ही कच्चे आम लगे हैं परन्तु हाल ही में हूई बारिश से कुछ बागानों में कच्चे आम गिरे हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अच्छी पैदावार आने की उम्मीद है। अंतरजल स्तर घटने तथा सूखे की मार में फंसे इलाकों में फल हाथ नहीं आए हैं। हुब्बल्ली तालुक में उम्मीद के हिसाब से फसल नहीं आई है। कलघटगी तालुक के कुछ हिस्सों में ओलों के साथ हुई बारिश से कच्चे आम गिरे हैं।

एक बारिश के बाद बढ़ेगी मांग
महाराष्ट्र के देवगढ से आम मंगवाया है। फिलहाल ग्रहकों की संख्या कम है। एक बारिश होने के बाद आमों की मांग बढ़ेगी। जिले के कुछ जगहों पर अच्छी फसल आई है तो कुछ जगहों में फूल गिरे हैं। इसी प्रकार फिलहाल बाजार में आए आमों का पैमाना कम होने से दाम पिछली बार से 30 से 50 रुपए अधिक हैं।
मुस्ताक मुंशी, व्यापारी

प्राकृतिक तौर पर पकाए गए आमों सेवन करें
कच्चे आमों को पकाने के लिए अधिकतर व्यापारी करबैड का इस्तेमाल करते हैं। इसका इस्तमाल करने से कुछ ही घंटों में आम पक जाते हैं परन्तु इनका सेवान करने वालों में स्वास्थ्य समस्या नजर आती है। कैंसर जैसी बीमारी होने का खतरा रहता है। इसके चलते ग्राहकों को वैज्ञानिक या फिर प्राकृतिक तौर पर पकाए गए आम का सेवन करने की ओर ध्यान देना चाहिए। आम में पोषकतत्व अधिक होते हैं, वसा की मात्रा नहीं होती। विटामिन ए अधिक होने से आम का अधिक सेवन कर सकते हैं।एम.एस. शिल्पश्री, वरिष्ठ सहायक निदेशक, बागबानी विभाग, हुब्बल्ली तालुक

बूंद सिंचाई को अपनाएं किसान
आम उत्पादक किसानों को बूंद सिंचाई अपनानी चाहिए। इसके लिए 90 फीसदी सहायता राशि दी जाती है। तुरन्त सुविधा देखने वाले किसान दीर्घावधि लाभ के बारे में विचार नहीं करते हैं। इस कारण बूंद सिंचाई सुविधा को प्राप्त करने वालों की संख्या कम है। रामचंद्र मडिवालर, उपनिदेशक, बागवानी विभाग