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विद्यार्थी केवल उपलब्धियों तक सीमित न रहें, समाज सेवा के लिए भी तैयार हों : राज्यपाल

राज्यपाल ने कहा कि भारत विकसित भारत India 2047 के लक्ष्य की ओर अग्रसर है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं की भूमिका निर्णायक है। यदि युवा ज्ञान, कौशल, मूल्यों और राष्ट्रीय भावना से सुसज्जित होंगे, तो भारत निश्चित रूप से वैश्विक मंच पर अग्रणी स्थान हासिल करेगा।

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दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को डिग्री व पदक प्रदान करते राज्यपाल थावरचंद गहलोत।

राज्यपाल थावरचंद गहलोत Thawar Chand Gehlot ने कहा कि विद्यार्थियों को निरंतर सीखते रहना चाहिए, क्योंकि सीखना ज्ञान और कौशल को अद्यतन रखने की प्रक्रिया है। बदलते समय की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शिक्षा के माध्यम से ज्ञान का विकास अत्यंत आवश्यक है।

डॉ. मनमोहन सिंह बेंगलूरु सिटी यूनिवर्सिटी Dr. Manmohan Singh Bengaluru City University के पांचवें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने शनिवार को कहा कि वर्तमान समय तेज बदलाव, तकनीक, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का युग है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा साइंस, जैव प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा, साइबर सुरक्षा और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्रों में निरंतर नए अवसर उभर रहे हैं। ऐसे समय में विद्यार्थियों को शिक्षा के माध्यम से ज्ञान अर्जित करना चाहिए।उन्होंने कहा कि बेंगलूरु देश की तकनीकी राजधानी और नवाचार की भूमि के रूप में प्रसिद्ध है। यह शहर केवल आइटी का केंद्र ही नहीं, बल्कि उद्यमिता, अनुसंधान और रचनात्मक सोच का प्रमुख केंद्र भी है।

युवाओं की भूमिका निर्णायक

राज्यपाल ने कहा कि भारत विकसित भारत India 2047 के लक्ष्य की ओर अग्रसर है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं की भूमिका निर्णायक है। यदि युवा ज्ञान, कौशल, मूल्यों और राष्ट्रीय भावना से सुसज्जित होंगे, तो भारत निश्चित रूप से वैश्विक मंच पर अग्रणी स्थान हासिल करेगा।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन को केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित न रखें, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझें।

नैतिकता और मानवीय मूल्य के बिना शिक्षा अधूरी

महात्मा गांधी Mahatma Gandhi का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी है। यदि शिक्षा में नैतिकता और मानवीय मूल्य शामिल नहीं हैं, तो वह अधूरी है।इस अवसर पर विश्वविद्यालय ने बी.के. वेंकटेश प्रसाद, अर्जुन जन्या, टी.के. नारायणस्वामी, डॉ. के. गोविंदराज, डॉ. मोहन अल्वा और बाबा मोहम्मद फारूक को मानद उपाधियों से सम्मानित किया।

37 हजार से ज्यादा को मिली डिग्री

दीक्षांत समारोह में कुल 37,393 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। इनमें 21,912 (58.63 फीसदी) छात्राएं और 15,458 (47.31 फीसदी) छात्र शामिल हैं। समारोह में 23 पीएचडी शोधार्थियों को डिग्री दी गई। साथ ही 71 छात्रों को रैंक प्रमाणपत्र, 73 स्वर्ण पदक और नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। इनमें 49 मेधावी छात्रों को कुल 64 स्वर्ण पदक और नकद पुरस्कार दिए गए।

समारोह में कुलपति प्रो. बी. रमेश सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।