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येत्तिनहोले परियोजना पर हो पुनर्विचार: विश्वेशतीर्थ स्वामी

चिंता: नदी का बहाव मोडऩा, वनों का विनाश करने के कदम हानिकारक

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येत्तिनहोले परियोजना पर हो पुनर्विचार: विश्वेशतीर्थ स्वामी

बेंगलूरु. उडुपी के पेजावर मठ प्रमुख विश्वेशतीर्थ स्वामी ने कहा कि पश्चिमी घाट में पर्यावरण के विनाश के कारण कोडुगू में आई बाढ़ के मद्देनजर येत्तिनहोले परियोजना के प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। इस परियोजना के तहत नेत्रावती नदी से पानी का रुख मोड़कर तुमकूरु तथा कोलार जिलों में पेयजल उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव किया गया है।

उन्होंने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नदी का बहाव मोडऩा और वनों का विनाश करने के कदम हानिकारक हैं और इस तरह के कदम उटाने से कोडुगू जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है, लिहाजा सरकार को येत्तिनहोले जैसी परियोजना पर पुनर्विचार करना चाहिए। इस संबंध में सरकार को समर्थन व विरोध कर रहे वैज्ञानिकों के साथ परामर्श करने के बाद अंतिम नतीजे पर पहुंचना चाहिए। स्वामी ने हालांकि स्पष्ट किया कि वे तुमकूरु व कोलार जिलों को पेयजल उपलब्ध करवाने के प्रस्ताव के खिलाफ नहीं है पर उनको चिंता इस बात की है कि यह परियोजना निरर्थक है, क्योंकि इससे मैदानी व तटीय दोनों इलाकों को पानी से वंचित होना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय है कि सरकार को इस परियोजना को समेट लेना चाहिए, क्योंकि इसके कारण दोनों क्षेत्रों में जल अभाव की स्थिति उत्पन्न होगी। लेकिन इस बारे में निर्णय सरकार को करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को पश्चिमी घाट क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के बारे में पेश की गई कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट के बारे में सावधानीपूर्वक किसी नतीजे पर पहुंचना चाहिए। राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालात पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वे राजनीतिक दलों द्वारा गठबंधन सरकार को अस्थिर करने के बारे में चली जा रही राजनीतिक चालों से खुश नहीं हैं।

कांग्रेस, जनता दल-एस तथा भाजपा तीनों ही दल सत्ता की राजनीति में लगे हैं। उन्होंने सरकार की स्थिरता समय की मांग है, लेकिन सभी दल एक दूसरे के विधायकों की खरीद फरोख्त की कोशिश में लगे हैं और निंदनीय है। मुस्लिम शरीयत की तर्ज पर हिन्दू न्यायालय की स्थापना के प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ऐसे न्यायालयों को केसों के बारे में निर्णय करने के लिए कभी समर्थन नहीं मिलेगा।

मठ के सामाजिक कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पेजावर मठ बेंगलूरु के मारतहल्ली में 2 एकड़ भूमि में 25 करोड़ रुपए की लागत से अस्पताल का निर्माण करवा रहा है। माधवाचार्य के जन्म स्थल उडुपी जिले के पजाका में एक आवासीय कालेज का निर्माण कार्य चल रहा है। हुब्बली व रायचूर में भी आवासीय कालेज निर्मित करने की योजना बनाई गई है।


शिरूर मठ के उत्तराधिकारी की नियुक्ति में हमारा कोई दखल नहीं
विश्वेशतीर्थ स्वामी ने एक सवाल पर कहा कि यह सच है कि शिरूर मठ प्रमुख को अष्ठदेवरु का ओहदा नहीं दिया गया था। शिरूर मठ के उत्तराधिकारी की नियुक्ति में उनका कोई दखल नहीं है, क्योंकि यह द्वंद्व मठ से जुड़ा मसला है। जरूरत पडऩे पर वे केवल सलाह दे सकते हैं। उडुपी के पेजावर मठ की तरफ से कोडुगू व केरल को बाढ़ राहत के तौर पर 10-10 लाख रुपए की सहायता दी जाएगी। इन क्षेेत्रों की पदयात्रा की जाएगी और वे सहायता राशि को सीधे बाढ़ प्रभावितों को वितरित किया जाएगा और सड़क,आवास निर्माण की योजनाएं शुरू की जाएंगी।