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ऋषि मंडल स्त्रोत प्रभावी एवं चमत्कारी-आचार्य महेन्द्रसागर

धर्मसभा का आयोजन

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ऋषि मंडल स्त्रोत प्रभावी एवं चमत्कारी-आचार्य महेन्द्रसागर

ऋषि मंडल स्त्रोत प्रभावी एवं चमत्कारी-आचार्य महेन्द्रसागर

बेंगलूरु. महावीर स्वामी जैन श्वतांबर मूर्तिपूजक संघ त्यागराजनगर में विराजित आचार्य महेंद्रसागर सूरी ने कहा कि जैन परंपरा में ऋषि मंडल स्त्रोत को परम प्रभावी एवं चमत्कारी माना गया है। यह एक तंत्र प्रभावित रचना है। इस स्त्रोत में अर्हम और ह्लीं दो बीजाक्षरों को सर्वाधिक शक्तिशाली बताया है। अर्हम में नवपद की स्थापना एवं ह्लीं में तीर्थंकरों की स्थापना है। इसमें घृति,कीर्ति और लक्ष्मी आदि महा देवियों की स्थापना का विधान तथा उनकी आराधना का उपाय भी बताया है। इसमें मुख्यतया डाकिनी-शाकिनी आदि दुष्ट स्वभाव वाली देवियों और भूत पिशाच आदि दुष्ट देवों से शरीर रक्षा की प्रार्थना भी की गई है। इस स्त्रोत पाठ का पाठ शुद्ध रीति से करने पर ऐहिक समस्त प्रकार की आदि व्याधियां दूर होती हैं और पारलौकिक सुख समृद्धि यावत मोक्ष की प्राप्ति होती है। स्त्रोत को पढऩे से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है। कर्मों की निर्जरा होती है और अपने जीवन में जो जो दुख तकलीफ आ गई हों तो ऋषि मंडल स्त्रोत के देवता उसे दूर-दूर दूर करते हैं। यह स्त्रोत बड़ा ही गोपनीय है। इसे हर किसी को नहीं दिया जा सकता, जो योग्य हो उन्हें ही देना चाहिए।