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आत्मा में रमण करने का अनुपम अवसर पौषध

अनादिकाल से संसार के परिभ्रमण कर रहे प्राणी को दुख और...

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आत्मा में रमण करने का अनुपम अवसर पौषध

बेंगलूरु. जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में महावीर धर्मशाला में 11वें व्रत का विवेचन करते हुए जयधुरन्धर मुनि ने आत्मा का पोषण करने के लिए श्रावक के द्वारा 24 घंटे तक चारों प्रकार के आहार के त्याग के साथ ही ब्रह्मचर्य का पालन भी किया जाता है।

उन्होंने कहा कि आत्मा में रास करने का अनुपम अवसर पौषध है, जो कि साधु जीवन का एक अभ्यास समझा जाता है।

जयपुरन्दर मुनि ने उत्तराध्ययन सूत्र के तीसरे अध्यन की वांचनी देते हुए कहा कि अनादिकाल से संसार के परिभ्रमण कर रहे प्राणी को दुख और यातना से मुक्त होने के लिए मनुष्य भव की प्राप्ति के परम दुर्लभ अवसर है।

सभा का संचालन संघ अध्यक्ष मीठालाल मकाणा ने किया।

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त्रि दिवसीय रत्नत्रयी जिनेंद्र भक्ति महोत्सव
बेंगलूरु. माधवनगर वासुपूज्य जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ के तत्वावधान में तीर्थप्रभावक विक्रम सूरीश्वर आदि अनेक तीर्थ संस्थापक पुण्यानंद सूरीश्वर, वीरसेन सूरीश्वर की पुण्यस्मृति में अनंतप्रभा की निश्रा में त्रि दिवसीय रत्नत्रयी जिनेंद्र भक्ति महोत्सव हुआ।

जिसमें भक्तामर अभिषेक, वासुपूज्य स्वामी अनुष्ठान एवं शांति पूजा अनुष्ठान में संघ के श्रावकों ने तीन दिन उल्लास से भाग लिया।