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बांसवाड़ा

उपखंड अ​धिकारी कार्यालय का वरिष्ठ सहायक घूस लेते गिरफ्तार

बांसवाड़ा/परतापुर. जिले के प्रशासन में कर्मचारी अपनों को भी नहीं बक्श रहे। सामान्य प्रकृति के विभागीय कामकाज पर भी बगैर घूस लिए काम नहीं हो रहा। इसकी बानगी सोमवार को गढ़ी उपखंड अधिकारी कार्यालय में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की कार्रवाई के दौरान सामने आई, जबकि एक वरिष्ठ सहायक तीन हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी ने एक कार्मिक के निर्वाह भत्ते और एरियर का बिल बनाने की एवज में यह राशि ली थी।

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बांसवाड़ा/परतापुर. जिले के प्रशासन में कर्मचारी अपनों को भी नहीं बक्श रहे। सामान्य प्रकृति के विभागीय कामकाज पर भी बगैर घूस लिए काम नहीं हो रहा। इसकी बानगी सोमवार को गढ़ी उपखंड अधिकारी कार्यालय में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की कार्रवाई के दौरान सामने आई, जबकि एक वरिष्ठ सहायक तीन हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी ने एक कार्मिक के निर्वाह भत्ते और एरियर का बिल बनाने की एवज में यह राशि ली थी।

ब्यूरो के कार्यवाहक महानिदेशक हेमंत प्रियदर्शी के निर्देशन में यह कार्रवाई ब्यूरो बांसवाड़ा इकाई के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक माधोसिंह के नेतृत्व में की। मामले में पिछले दिनों एक एलडीसी ने पिछले दिनों शिकायत की थी कि वह पूर्व में निलंबित कर दिया गया था। निलंबन अवधि के निर्वाह भत्ते और एरियर के बिलों के लिए गुजारिश की, तो एसडीओ कार्यालय में प्रतिनियुक्त और मूल राजकीय राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, झड़स के वरिष्ठ सहायक मुस्तफा शेख ने इसके लिए पांच हजार रुपए रिश्वत मांगी। नहीं दे पाने पर वह काम अटकाकर उसे परेशान कर रहा है। इस पर ब्यूरो उदयपुर के उपमहानिरीक्षक पुलिस राजेंद्रप्रसाद गोयल के पर्यवेक्षण में एएसपी माधोसिंह ने शिकायत का सत्यापन कराया। इस दौरान हालांकि परिवादी ने कुछ नहीं दिया, लेकिन अपनी तंग माली हालत का हवाला देकर राशि कुछ कम करने का आग्रह किया। इस पर मुस्तफा शेख ने तीन हजार रुपए ही देने की बात कही। इससे मांग की पुष्टि हो गई, तो ब्यूरो की टीम ने ट्रेप करने की प्लानिंग की। इसके तहत सोमवार को परिवादी को रंग लगे नोट देकर भेजा गया, तो बोरी रोड, गढ़ी निवासी वरिष्ठ सहायक मुस्तफा शेख पुत्र इब्राहिम शेख के पास भेजा गया। जैसे ही उसने परिवादी से 3 हजार रुपए रिश्वत ली, संकेत पाकर टीम ने पहुंचकर धरदबोचा। मामले में अब एसीबी की ओर से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर अग्रिम अनुसंधान किया जाएगा।

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