
#राजस्थान_का-रण : बांसवाड़ा की इस विधानसभा सीट का 40 वर्षों में खत्म हुआ अस्तित्व, जनता का दल का रहा दबदबा
बांसवाड़ा. विधानसभा के गठन के लिए प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र का अलग महत्व होता है और विधानसभा सीट का गठन करने के बाद क्षेत्रीय विकास की इबारत लिखी जाती है। बांसवाड़ा जिले में एक विधानसभा सीट ऐसी रही है, जो चौथे विधानसभा आम चुनाव में अस्तित्व में आई, लेकिन परिसीमन के कारण महज 40 वर्षों में इतिहास में समाहित हो गई। जी हां! बात जिले की दानपुर विधानसभा सीट की है। इस सीट पर 1967 में पहली बार चुनाव हुआ और अंतिम चुनाव 2003 में। यहां से निर्वाचित विधायक का अंतिम कार्यकाल 2008 तक रहा और परिसीमन में यह सीट खत्म हो गई और इस सीट के तहत आने वाले अधिकांश क्षेत्र को बांसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में सम्मिलित किया गया। पहले दानपुर सीट में छोटी सरवन पंचायत समिति की दानपुर, वागतलाब, हरनाथपुरा, जहांपुरा, छायनबड़ी, मकनपुरा, फेफर, नादिया, नापला, बारी, कटुम्बी, दनाक्षरी, छोटी सरवन, मूलिया, खजूरी, कोटड़ा, घोड़ी तेजपुर, गागरवा सहित बांसवाड़ा पंचायत समिति की भी कई ग्राम पंचायतें शामिल थी।
जनता दल का गढ़
दानपुर विधानसभा सीट जनता दल का गढ़ रही। प्रख्यात समाजवादी नेता और आदिवासियों के मसीहा माने जाने वाले मामा बालेश्वर दयाल के विचारों को आत्मसात करने वाले अनुयायियों की बदौलत इस सीट पर जनता दल, लोकदल, सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशियों की ही जीत होती रही। गठन के बाद यहां नौ बार चुनाव हुए, जिसमें कांगे्रस मात्र पहली और अंतिम बार 2003 में यहां से जीत हासिल कर सकी।
सभी सीट आरक्षित
2008 के चुनाव के करीब डेढ़-दो वर्ष पहले हुए परिसीमन में जिले की सभी सीट जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हो गई। इसमें दानपुर सीट का तो अस्तित्व खत्म हो गया, वहीं बांसवाड़ा सामान्य सीट भी जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हो गई। दानपुर के स्थान पर जिले में गढ़ी विधानसभा सीट का गठन किया गया।
यह रहे विधायक
1967 वि_ल सोशलिस्ट पार्टी
1972 वि_ल सोशलिस्ट पार्टी
1977 बहादुर सिंह जनता पार्टी
1980 बहादुरसिंह जनता पार्टी
1985 बहादुरसिंह लोकदल
1990 बहादुरसिंह जनता दल
1993 दलीचन्द मईड़ा जनता दल
1998 भाणजी जनता दल
2003 अर्जुनसिंह बामनिया कांगे्रस
Published on:
19 Oct 2018 01:38 pm
बड़ी खबरें
View Allबांसवाड़ा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
