आंखों में नींद, सिर पर खुला आसमान
रात ग्यारह बजे रेलवे स्टेशन परिसर पर तीन-चार समूह में लोग बैठे हुए थे। दो जने एक ही कम्बल में परिसर की सीढिय़ों के समीप सोए हुए थे। इनके नजदीक एक श्वान भी सर्दी के चलते कुंडली जमाकर बैठा था। इसी परिसर में तीन अन्य लोगों के समूह कम्बल ओढ़ कर एकदम सटे हुए बैठे थे। यह लोग पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले से यहां दिहाड़ी मजदूरी के लिए आए हुए थे। इनका कहना था कि देर रात को जब पुलिस गश्त थमेगी, तब वे क्षेत्र की दुकानों की थड़ों पर जाकर सोएंगे। इससे तड़के आसमां से टपकने वाली ओस से बचाव हो जाएगा। रैन बसेरों में उन्हें नियमित रूप से प्रवेश नहीं मिलता।