
बरेली। डिजिटल इंडिया के दौर में जहां बिजली बिल का भुगतान अब चुटकियों में मोबाइल से हो जाता है, वहीं एक छोटी सी तकनीकी चूक ने शहर के हजारों उपभोक्ताओं की रातों की नींद उड़ा दी। पूरा पेमेंट करने के बावजूद अचानक हजारों रुपये के बकाया का मैसेज… और फिर शुरू हुई टेंशन, चक्कर और सवालों की लंबी कहानी। क्या अब विभाग इस परेशानी से उपभोक्ताओं को स्थायी राहत देगा?
क्रिस्टकल कॉलोनी निवासी अमन ने बताया कि वह हमेशा समय से बिजली बिल जमा करते हैं। 3 फरवरी को उनका बिल लगभग ₹1650 आया, जिसमें से उन्होंने ₹1051 रुपए जमा भी कर दिए। मामला यहीं खत्म होना चाहिए था… लेकिन 14 फरवरी की शाम एक ऐसा मैसेज आया जिसने उनके होश उड़ा दिए। मैसेज में लिखा था, ₹16 हजार से ज्यादा बकाया, बोले कि मैंने जैसे ही मैसेज देखा, मुझे रात में टेंशन हो गई। समझ नहीं आया कि ऐसा कैसे हो सकता है। अमन बताते हैं।
15 फरवरी को रविवार होने के कारण वह दफ्तर नहीं जा सके। 16 फरवरी को सुबह 10 बजे बिजली कार्यालय पहुंचे। जब सारी रसीदें दिखाईं गईं तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई।
उनका मोबाइल नंबर किसी ‘सागर’ नाम के दूसरे उपभोक्ता के कनेक्शन में भी दर्ज था!। यानी दूसरे के बकाया बिल के मैसेज अमन को जा रहे थे। विभाग ने स्पष्ट किया कि उन्हें सिर्फ अपना वास्तविक बिल ही देना होगा। यहां तक कि उस नंबर पर उनका यूपीपीसीएल का निगम और स्टेट भी चेंज था। उसके बाद भी लगातार उनके नाम पर बिल आ रहा है।
दूसरा मामला बारादरी परिया निवासी कलीमुद्दीन का है। उन्होंने 10 फरवरी को ₹14,270 का बिल जमा किया। अगले ही दिन मोबाइल पर मैसेज आया₹20 हजार से अधिक बकाया। “मैं घबरा गया। लगा अब फिर चक्कर लगाने पड़ेंगे,” कलीमुद्दीन कहते हैं। रसीद लेकर बिजली घर पहुंचे तो खुलासा हुआ। उनका मोबाइल नंबर किसी ‘सुमित’ नाम के व्यक्ति के कनेक्शन में भी इस्तेमाल हो रहा था। इस वजह से दूसरे के बकाया बिल के मैसेज उन्हें भेजे जा रहे थे। विभाग ने साफ किया कि असली बकाया शून्य है, कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए एसएमएस और व्हाट्सएप अलर्ट सेवा शुरू की है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) समय पर बिल और बकाया की जानकारी भेजता है। लेकिन जब डाटा एंट्री में गलती हो जाए, तो यही सुविधा मानसिक तनाव में बदल जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि नया कनेक्शन जारी करते समय या मोबाइल नंबर अपडेट करते समय कई बार ओटीपी सत्यापन ठीक से नहीं किया जाता। नतीजा—एक नंबर, दो कनेक्शन… और झेलना पड़ता है मानसिक दबाव।
सिटी एसई धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि
“यदि किसी उपभोक्ता को गलत बिल की सूचना मिलती है तो वह तुरंत नजदीकी विद्युत कार्यालय या ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकता है। 15 दिन के भीतर सुधार कर दिया जाता है।” हर्जाने का हक भी। उपभोक्ता मामलों के अधिवक्ता मो. खालिद जिलानी का कहना है कि यदि गलत डाटा एंट्री के कारण मानसिक प्रताड़ना या आर्थिक नुकसान होता है तो उपभोक्ता हर्जाने का दावा भी कर सकता है। विभाग की जिम्मेदारी है कि उपभोक्ता का डाटा सही रखे।” भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करता है। जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता वहां भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर लॉगिन कर शिकायत दर्ज करें।
मोबाइल नंबर डिलीट/सुधार के लिए लिखित आवेदन दें।
कंप्लेंट नंबर सुरक्षित रखें।
30 दिन में समाधान न मिले तो उपभोक्ता फोरम जाएं।
इन बातों का रखें खास ध्यान
मोबाइल नंबर अपडेट करते समय ओटीपी सत्यापन जरूर कराएं।
हर महीने बिल की डिटेल जांचें।
अज्ञात कनेक्शन नंबर दिखे तो तुरंत शिकायत दर्ज करें।
अपने नंबर को आधार या अन्य सेवाओं की तरह सुरक्षित रखें।
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Updated on:
20 Feb 2026 12:51 pm
Published on:
20 Feb 2026 12:50 pm
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