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अब डॉक्टर नहीं, एआई करेगा मरीजों का इलाज… इस नई टेक्नोलॉजी से बदलेगा हेल्थ सिस्टम, जानें

अब इलाज का अंदाज बदलने जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्रांति विषय पर आयोजित व्याख्यान ने साफ कर दिया कि आने वाले समय में मरीजों का इलाज सिर्फ दवाइयों से नहीं, बल्कि डेटा और डिजिटल तकनीक से होगा।

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बरेली। कैंट में अब इलाज का अंदाज बदलने जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्रांति विषय पर आयोजित व्याख्यान ने साफ कर दिया कि आने वाले समय में मरीजों का इलाज सिर्फ दवाइयों से नहीं, बल्कि डेटा और डिजिटल तकनीक से होगा। कैंट बोर्ड की सीईओ डॉ. तनु जैन की पहल पर हुए इस कार्यक्रम में एआई की ताकत का ऐसा खाका पेश किया गया, जिसने मौजूद स्टाफ को हैरत में डाल दिया।

प्रख्यात विशेषज्ञ डॉ. मधु रैकवार ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य नहीं, वर्तमान बन चुकी है। एआई के जरिए गंभीर बीमारियों की समय रहते सटीक पहचान संभव हो रही है। डिजिटल डायग्नोस्टिक्स से रिपोर्टिंग तेज हो रही है, रोबोटिक सर्जरी से जोखिम कम हो रहा है और मरीजों के डेटा का विश्लेषण कर इलाज को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा इलाज की दुनिया बदल रही है, और जो इस बदलाव को अपनाएगा, वही आगे रहेगा।

टेलीमेडिसिन से घर बैठे इलाज, सिस्टम होगा पारदर्शी

व्याख्यान में बताया गया कि एआई आधारित टेलीमेडिसिन के जरिए अब दूर-दराज के मरीज भी विशेषज्ञ डॉक्टरों से जुड़ सकते हैं। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि इलाज में पारदर्शिता और गुणवत्ता भी बढ़ेगी। मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री का डिजिटल रिकॉर्ड रखने से इलाज में गलतियों की संभावना भी कम होगी।

कैंट में हाई-टेक हेल्थ की तैयारी

डॉ. तनु जैन के नेतृत्व में कैंट क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीकी रूप से मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इसी मकसद से यह व्याख्यान आयोजित किया गया, ताकि अस्पताल और कार्यालय स्टाफ आने वाले डिजिटल बदलाव के लिए मानसिक और तकनीकी रूप से तैयार हो सके। संदेश साफ है कि कैंट का स्वास्थ्य तंत्र अब पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकलकर हाई-टेक मॉडल की ओर बढ़ रहा है।

सवाल-जवाब में निकले कई अहम बिंदु

कार्यक्रम के दौरान अस्पताल और कार्यालय स्टाफ ने खुलकर सवाल पूछे। एआई के फायदे, चुनौतियां और भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर चर्चा हुई। कई कर्मचारियों ने माना कि तकनीक को अपनाना समय की जरूरत है। कार्यक्रम के अंत में आरएमओ डॉ. वंदना ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार जताया। कुल मिलाकर यह व्याख्यान सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संकेत है कि बरेली कैंट में इलाज की तस्वीर बदलने वाली है— जहां डॉक्टर के साथ अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी मरीज की सेहत की पहरेदारी करेगा।