
बरेली। 26 सितंबर को हुए बरेली दंगों में चली गोलियों की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि पुलिस ने बड़ा खुलासा कर दिया। बहेड़ी पुलिस ने दो ऐसे शातिरों को दबोचा है, जो दंगाइयों तक अवैध हथियार पहुंचा रहे थे। गिरफ्तारी के साथ ही हिंसा के पीछे काम कर रहे असलहा नेटवर्क का चेहरा सामने आने लगा है।
एसपी उत्तरी मुकेश चंद मिश्रा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तसलीम (निवासी जोखनपुर, थाना बहेड़ी) और सोमू खान उर्फ औशाफ (निवासी बरीपुरा, थाना शेरगढ़) के रूप में हुई है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने शेरगढ़ अड्डे पर घेराबंदी कर दोनों को पकड़ा। जांच में सामने आया कि दोनों का उठना-बैठना कुख्यात हिस्ट्रीशीटर इशरत अली के साथ था। बरामद स्विफ्ट कार भी उसी की बताई जा रही है, जिसका इस्तेमाल हथियारों की ढुलाई में होता था। पुलिस ने इनके पास से 5 अवैध 32 बोर पिस्टल, 36 जिंदा कारतूस, 2 तमंचे (315 और 12 बोर), कई कारतूस, एक स्विफ्ट कार और दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामदगी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
पुलिस ने जब आरोपियों के मोबाइल फोन खंगाले तो कई चौंकाने वाले वीडियो और फोटो सामने आए। एक वीडियो में गैंग का सरगना इशरत अली अवैध पिस्टल से टेस्ट फायर करता दिखाई दे रहा है। पूछताछ में सोमू खान ने कबूल किया कि 26 सितंबर को हुए दंगों के दौरान उसने झुमका तिराहा पर बड़ी खेप में पिस्टल और कारतूस पहुंचाए थे। वीडियो कॉल के जरिए हथियारों की सप्लाई की पुष्टि की जाती थी। इस स्वीकारोक्ति के बाद साफ है कि दंगों में इस्तेमाल हथियार इसी गिरोह के जरिए पहुंचे थे।
मामले में इशरत अली, फरहत अली, गफ्फार और समीर अभी फरार हैं। पुलिस ने सभी के खिलाफ आर्म्स एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। पुलिस टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। एसपी उत्तरी का कहना है कि जल्द ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर सभी को जेल भेजा जाएगा।
इस कार्रवाई के बाद यह साफ हो गया है कि दंगा अचानक भड़का मामला नहीं था, बल्कि इसके पीछे अवैध हथियारों की सप्लाई का संगठित जाल काम कर रहा था। अब सवाल यही है कि इस नेटवर्क की डोर और किन-किन तक जाती है। पुलिस जांच आगे बढ़ रही है और शहर की नजरें अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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Published on:
19 Feb 2026 05:20 pm
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