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मिट्टी के दीयों से रोशन होगी उम्मीद: कुम्हारों के घर पहुंचा कैंट बोर्ड, ‘वोकल फॉर लोकल’ को जमीन पर उतारने की बड़ी पहल

स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कारीगरों को नई पहचान दिलाने की दिशा में गुरुवार को सराहनीय पहल देखने को मिली।

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बरेली। स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कारीगरों को नई पहचान दिलाने की दिशा में गुरुवार को सराहनीय पहल देखने को मिली। बरेली कैंटोनमेंट बोर्ड की टीम ने एक कुम्हार परिवार के घर पहुंचकर उनके कार्यस्थल का निरीक्षण किया और मिट्टी के दीयों व अन्य मृद्भांडों के निर्माण कार्य को करीब से देखा।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने देखा कि सीमित संसाधनों के बीच कारीगर परिवार सैकड़ों की संख्या में दीये तैयार कर रहा है। धूप में सूखते दीयों की कतारें और परिवार की लगन ने टीम को खासा प्रभावित किया। अधिकारियों ने निर्माण की पूरी प्रक्रिया समझी और कारीगरों के हुनर की सराहना की।

समस्याएं सुनीं, मदद का भरोसा

अधिकारियों ने कारीगरों से सीधा संवाद कर उनकी प्रमुख समस्याएं जानीं। कारीगरों ने विपणन के अभाव, कच्चे माल की लागत और आर्थिक तंगी जैसी चुनौतियों को सामने रखा। इस पर कैंट बोर्ड की सीईओ तनु जैन ने आश्वासन दिया कि आगामी हस्तशिल्प प्रदर्शनियों, मेलों और सामुदायिक आयोजनों में स्थानीय कारीगरों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि उन्हें बड़ा बाजार और बेहतर मंच मिल सके।

वोकल फॉर लोकल को मिलेगा बल

बोर्ड प्रतिनिधियों ने कहा कि पारंपरिक शिल्पकला का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के साथ-साथ स्थानीय रोजगार को भी मजबूती देता है। बरेली कैंटोनमेंट बोर्ड ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना के साथ कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। स्थानीय स्तर पर शुरू हुई यह पहल न केवल कारीगरों के चेहरे पर उम्मीद की मुस्कान ला रही है, बल्कि पारंपरिक कला को भी नई ऊर्जा दे रही है।