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लम्बा सफर और रेतीले इलाके में दूर-दूर तक बसी ढाणियां। एेसे में आग लगने की घटना हो जाए तो बुझाने के लिए दमकल की कोई व्यवस्था नहीं। क्योंकि अधिकांश क्षेत्रों में बड़े वाहन जा ही नहीं सकते। एेसे में जरुरत फोर बाइ फोर दमकल की है, जो यहां है नहीं। कहने को जिला मुख्यालय पर पांच दमकल है, लेकिन ढाणियां तक ये पहुंच ही नहीं पाती।
जिला कलक्टर की ओर से राज्य सरकार को करीब एक वर्ष पहले छोटी दमकल का प्रस्ताव भी भेजा गया, जो क्रियान्वत नहीं हुआ। जनप्रतिनिधियों ने भी ठोस पैरवी नहीं की। उल्लेखनीय है कि जिले में प्रतिवर्ष औसतन 250 से अधिक ढाणियां आग से स्वाह हो जाती है।
अभी यह दिक्कत
150 किमी तक दूरी जिला मुख्यालय के अलावा बालोतरा नगरपरिषद में दमकल वाहन है। अन्य स्थानों पर इसकी व्यवस्था नहीं होने से यहां से डेढ़ सौ किमी तक वाहन को जाना पड़ता है। इस सफर में दो से तीन घंटे लग जाते हैं। तब तक झोंपों में लगी आग बुझ जाती है।
आक्रोश सहन करते हैं फायरकर्मी
फायरकर्मियों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाती है जब वे सूचना पर लंबी दूरी तय कर पहुंचते हैं। वहां पहुंचते ही देरी के लिए उन्हें ग्रामीणों का कोपभाजन बनना पड़ता है।
फैक्ट फाइल
जिला मुख्यालय पर संसाधन1 दमकल छोटी- 2000 लीटर
3 दमकल बड़ी-4500 लीटर
1 टैंकर बड़ा- 14000 लीटर
वर्ष अग्नि प्रकरण पशु क्षति मानव क्षति
2009 219 05 05
2010 642 50 11
2011 635 36 17
2012 632 15 15
2013 690 37 04
2014 440 98 01
2015 169 15 04
2016 265 35 00
Published on:
10 Mar 2017 11:16 am
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