
Rajasthan News : बाड़मेर.सरहदी बाड़मेर-जैसलमेर में बॉर्डर टूरिज्म सर्किट विकसित किया जाएगा। (कच्छ) गुजरात से जैसलमेर (राजस्थान) टूरिज्म को जोड़ने का नया मार्ग बनेगा। कच्छ के रण तक आ रहे टूरिस्ट को जैसलमेर तक जाने से पहले रास्ते में बाड़मेर में बॉर्डर टूरिज्म मिले इसका प्लान तैयार किया जा रहा है। 1965 और 1971 की भारत-पाक युद्ध की रणस्थली बाड़मेर में बॉर्डर टूरिज्म से रोजगार के नए अवसर तैयार होने की विपुल संभावनाएं हैैं।
गुजरात के कच्छ के रण (Rann of Kutch Gujarat) तक दक्षिण भारत से आने वाले अधिकांश पर्यटक आते हैैं । ये आगे जैसलमेर पहुंचते हैं। जैसलमेर में पर्यटन का सालाना 1500 करोड़ का व्यवसाय है। रास्ते में बाड़मेर है लेकिन यहां पर्यटन विकास नहीं होने से पयर्टक ठहरते नहीं है। कई गुजरात से पर्यटक जोधपुर का रास्ता चुन लेते है। 2009 में तेल उत्पादन के बाद बाड़मेर सालाना राज्य को 3800 करोड़ का राजस्व दे रहा है और केन्द्र को 6500 करोड़। ऐसे में अब बाड़मेर को तेल के बाद पर्यटन सर्किट बनाकर रोजगार के अवसर देने के लिए प्लान तैयार किया जा रहा है।
यह रहेगा पर्यटन सर्किट- कच्छ वाया बाखासर, मुनाबाव-जैसलमेर
बॉर्डर टूरिज्म में इन पर भी ध्यान
गडरारोड शहीद स्थल : 1965 के युद्ध में यहां 17 रेलवे कार्मिक शहीद हुए थे। यहां पर रेलवे हर साल मेला आयोजित करती है। यहां पर पैनोरमा, रेलवे स्मारक को लेकर मांग की हुई है।
किराडू वर्ल्ड हैरिटेज (Kiradu World Heritage): 11 वीं सदी के किराडू के भग्नावेश मंदिर है। इनको वर्ल्ड हैरिटेज में शामिल करने के लिए प्रयास किए जा रहे है। साथ ही वनविभाग यहां इको टूरिज्म विकसित करने के लिए योजना बना रहा है।
यों बढ़ी संभावनाएं
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (CM Bhajan Lal Sharma) ने तीन बार ताईद की है कि यहां बॉर्डर टूरिज्म का सर्किट बनेगा। उन्होंने सेड़वा, जैसलमेर और बाड़मेर तीन जगह पर यह बात कही। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी बाड़मेर में इस बात को जोर देकर कहा कि कच्छ में बॉर्डर टूरिज्म हो सकता है तो बाड़मेर में क्यों नहीं?
मुनाबाव- अंतिम रेलवे स्टेशन
मुनाबाव भारत का अंतिम रेलवे स्टेशन (Munabao Railway Station) है। वर्ष 1900 में यहां से रेल पाकिस्तान जाती थी। 122 साल पुराने इस रेल मार्ग है। बाखासर से पर्यटक मुनाबाव पहुंच यहां पर रेगिस्तान,दुरूह गांव, शौर्य का स्थल और डीएनपी (डेजर्ट नेशनल पार्क) (Desert National Park) के गांवों में भ्रमण का भी अलग अनुभव प्राप्त कर सकता है। मुनाबाव में बाघा बॉर्डर (Wagah Border) की तर्ज पर ही सेल्यूट सेरेमनी के लिए भी बीएसएफ को प्रस्ताव भेजा हुआ है। इसके पास में ही रोहिड़ी के धोरे है। यह मखमली धोरे जैसलमेर के सम की तरह ही है। सम में 300 करोड़ का सालाना व्यवसाय है।
बाखासर का रण कच्छ के रण से जुड़ा है। यह पाकिस्तान बॉर्डर के निकट है। 1971 के युद्ध में ब्रिगेडियर भवानीसिंह और बलवतसिंह बाखासर ने यहीं से कूच किया। पाकिस्तान के भीतर 100 किमी तक घुसे और छाछरो फतेह किया। भारत के कब्जे में पाकिस्तान की यह जमीन शिमला समझौते तक रही थी। यह शौर्य का बड़ा स्थल है। यहां पर कच्छ की तर्ज पर ग्रामीण संस्कृति की हट बनाने, कच्छ के रण से बाड़मेर के रण तक रास्ता बनाकर रण पर्यटन विकसित करने, बाखासर में नमक उद्योग विकास और बॉर्डर के युद्ध का बड़ा स्मारक बनाने की योजना है।
Updated on:
15 May 2024 03:47 pm
Published on:
15 May 2024 03:46 pm
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