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राजस्थान में बॉर्डर के इन गांवों में दुकानों पर बिकता है पेट्रोल -डीजल

- गांव सून्दरा से 100 किमी दूर है पेट्रोल पंप- पंद्रह हजार की आबादी वाले कस्बे गडरारोड में भी नहीं पंट्रोप पंप- ग्रामीणों को अवैध रूप से लाना पड़ता है पेट्रोल- डीजल

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Petrol-Diesel sells at shops in these villages of Border

बॉर्डर के इन गाँवों में दुकानों पर बिकता है पेट्रोल -डीजल,जानिए पूरी खबर

भीखभारती गोस्वामी@गडरारोड(बाड़मेर).सीमावर्ती क्षेत्र में सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) व विभिन्न योजनाओं में सड़कों पर करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं। भारतमाला योजना में सड़कों का जाल बिछ रहा है और अब वाहनों की रेलमपेल भी है लेकिन सुनने में अजीब लगेगा कि बॉर्डर के 100 किमी इलाके में पेट्रोल नहीं है । पेट्रोल और डीजल पंप की बजाय दुकानों पर खरीदा- बेचा जाता है, जो अवैध है ।
गडरारोड से सुंदरा तक के सौ किलोमीटर क्षेत्र में गडरारोड़ पंद्रह हजार की आबादी का बड़ा कस्बा है और इसके आसपास के सौ किलोमीटर में करीब 25 से 30 हजार की आबादी गांवों में है। यहां पेट्रोल पंप नहीं है। बॉर्डर के इन गांवों के लोगों को रामसर कस्बे जाना पड़ता है जहां पेट्रोल पंप है ।

दुकानों में रखते हैं पेट्रोल- डीजल

पंप नहीं होने पर कई दुकानों में पेट्रोल- डीजल लाकर रखा जाता है जिसको बोतल और जरीकन में पैक कर ग्राहकों को दिया जाता है। इसकी कीमत भी पेट्रोल पंप से पांच-दस रुपए प्रतिलीटर ज्यादा ली जा रही है। इस तरह खुले में पेट्रोल डीजल रखना खतरनाक भी है।

मिलावटी पेट्रोल- डीजल पर करें क्या

ग्रामीणों का कहना है कि उनको ज्यादा दाम में मिल रहे पेट्रोल डीजल में केरोसिन की मिलावट रहती है। इसकी शिकायत भी किसी को नहीं कर सकते है क्योंकि उन्हें मालूम है कि दुकानदार यहां लाकर उनको सहूलियत दे रहा है। वह बंद कर देगा तो फिर सौ किलोमीटर जाना पड़ेगा जो इससे भी महंगा होगा।

वाहन बढ़ गए लेकिन सुविधा नहीं- पिछले एक दशक में बॉर्डर के हालात एकदम बदल गए हैं। अब हर गांव में दस से पंद्रह दुपहिया वाहन हो गए हैं। कार- जीप भी बढ़ी है। वाहन बढऩे के बावजूद पेट्रोल पंप यहां नहीं है। गडरारोड में तो दुपहिया वाहन की एजेंसी है और ट्रैक्टर भी बड़ी संख्या में है ।

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