
भारत और पाकिस्तान के लोग वीडियो कॉलिंग के जरिये बातों में मस्त,आखिर ऐसा क्यों? जानिए पूरी खबर
बाड़मेर. भारत और पाकिस्तान दोनों मुल्कों की सियासत के बनते बिगड़ते रिश्तों में बार-बार पिसने वाली आम आवाम को इंटरनेट और सोशल मीडिया ने बड़ा सुकून दिया है। दोनों देशों की कड़वाहट से अब इनको उतना फर्क नहीं पड़ता जितना एक दशक पहले था। आलम यह है कि पाकिस्तान की सलमा पल-पल वीडियो कॉलिंग के जरिए हिन्दुस्तान की शम्मा से बात करते हुए रेसिपी सीख रही है और यहां भले ही सियासतदार सीमा विवाद को लेकर बयान जारी कर रहे हैं।
आजादी के बाद से 2010 तक यह स्थिति रही कि भारत और पाकिस्तान के बीच मामूली विवाद होने पर सरहद पर बसे परिवारों पर असर पड़ा। रोटी-बेटी के रिश्ते से जुड़े ये परिवार तनाव में इतने तनावपूर्ण हो जाते कि उन्हें यह लगने लगता कि अब उनका अपनों से मिलन होगा या नहीं। करगिल युद्ध के बाद तो एक दशक तक दोनों देशों के बीच आवागमन बंद होने पर एक दूसरे की सूरत देखने को भी लोग तरस गए थे। 2006 में थार एक्सप्रेस चली तो लोग दशक-डेढ़ दशक बाद अपनों से मिलकर गले लगकर रोए। इन भावुक दृश्यों का सिलसिला अब टूटने लगा हैै। दरअसल यह बदलाव इंटरनेट क्रांति से आया है। इंटरनेट और सोशल मीडिया शुरू होने के बाद अब दोनों देशों के रिश्तेदार एक दूसरे से बात करने में किसी तरह की हिचक नहीं कर रहे। दोनों ओर से वीडियो कॉलिंग होती है।
दिनभर एक दूसरे से जुड़े हुए- इंटरनेट कॉल पर खर्च भी ज्यादा नहीं है। एेसे में एक दूसरे से दिनभर जुड़े रहते हैं। आलम यह है कि सुबह की सब्जी और शाम के जायके के समाचार महिलाएं एक दूसरे से लेती है और खाने की रेसिपी तक शेयर होने लगी है। दिनभर का यह जुड़ाव से दोनों मुल्कों के बीच की दूरियों का अहसास कम होने लगा है।
सुरक्षा की दृष्टि से मुश्किल- जहां एक ओर इससे रोटी-बेटी का रिश्ता जीने वालों के लिए सहूलियत हुई है दूसरी ओर सुरक्षा की दृष्टि से यह मुश्किलें बढ़ा रहा है। इंटरनेट कॉल व चेट पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं होने से इसका पता नहीं चल पाता कि किस समय सामरिक लिहाज से यह खतरा बन सकता है। टेलीफोन कॉल का तो इंद्राज करने और नियंत्रण का सिस्टम है।
काफी सुकून मिला है- इंटरनेट वीडियो कॉलिंग से काफी सुकून मिला है। परिजनों से किसी भी समय वीडियो कॉलिंग हो जाती है। उनके समाचार मिल जाते हैं। देश के तनाव से अब रिश्तेदारों को कोई लेना देना नहीं है। उन्हें अपनों की ङ्क्षचता है जो खत्म हो रही है।- घनश्याम माली, शरणार्थी
सुरक्षा को लेकर फिक्र- सुरक्षा को लेकर फिक्र तो है ही। इसका कहीं पर इंद्राज नहीं हो रहा है और कोई नियंत्रण भी नहीं है। वीडियो कॉलिंग भी हर समय होती है लेकिन इसमें कर कुछ नहीं सकते।
- डॉ. गगनदीप सिंगला, पुलिस अधीक्षक बाड़मेर
Published on:
13 Jul 2018 08:44 am
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