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विपिन भंसाली
राजस्थान के रेगिस्तान में बहुतायत के साथ बिकने वाले औषधीय कुमट के गोंद का उत्पादन बढ़ाने के लिए इंजेक्शन लगाए जा रहे है। इस इंजेक्शन से उत्पादन तो बढ़ रहा है, लेकिन गुणवत्ता घट रही है।
जानकार लोग अब कुमट लगे गोंद के 400 रुपए प्रति किलोग्राम ही दे रहे हैं, जबकि बिना इंजेक्शन का गोंद 2500 रुपए प्रति किलोग्राम है। ठगी अनजान और शहरी कल्चर के ग्राहकों के साथ होने लगी है। अप्रेल व मई तथा सितम्बर-अक्टूबर महीनों में वर्ष में दो बार गोंद का उत्सर्जन होता है।
राजस्थान में प्राकृतिक एवं शुद्ध गोंद की कीमत हर वर्ष बढ़ रही है, लेकिन गोंद का उत्पादन बढ़ाने के लिए पेड़ों में इंजेक्शन लगाकर गोंद निकालने के कारण इसकी गुणवत्ता घटने लगी। तने में इंजेक्शन लगाने से यह पेड़ दो से तीन गुणा अधिक गोंद उत्सर्जित कर लेता है।
ऐसे में अब जैविकता और गुणवत्ता घटने से लोग इसे कम पसन्द करने लगे हैं। बिना इंजेक्शन का गोंद 25 सौ रुपए प्रतिकलो बिक जाता है वहीं इंजेक्शन वाले गोंद के खरीददार चार सौ के भाव से भी नहीं खरीदते।
कुमट के पेड़ से निकलने वाला गोंद औषधीय गुणों की खान है। सर्दी में गोंद से बनाए जाने वाले लड्डू गुणकारी माने जाते हैं। आयुर्वेद मानता है कि गोंद प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होने के कारण इसका सेवन कई बीमारियों को दूर करने, हड्डियों को मजबूती प्रदान करने के साथ ही केल्शियम को स्थिर बनाता है।
राजस्थान के धनाऊ, आलमसर, ईटादा, कोनरा, आंटिया, कापराऊ, नेतराड़, बींजासर, भोजारिया, रमजान की गफन, रतासर, बीजराड़, नवातला, बूठ राठौड़ान, गंगाला, खारिया राठौड़ान, सहित बाखासर के हाथला, रामपुरा, भलगांव, एकल, भाड़ा, नवापुरा अरटी आदि गांवों में पेड़ बहुतायत में हैं।
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प्रसूता महिलाओं को प्रसव के बाद कातीरा (कुमट) गोंद का सेवन करवाया जाता है, यह महिलाओं की रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है। स्तनपान के लिए दूध को बढ़ाने में भी मदद मिलती है, कब्ज में गोंद कतीरा खाने के फायदे बहुत हैं। यह सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार की परेशानी तथा पेट में इंफेक्शन के खतरे को भी कम करता है। इसके सेवन से थकान, कमजोरी, चक्कर आना, उल्टी और तनाव को कम करता है।
Published on:
20 Jan 2025 12:43 pm
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