14 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan News: राजस्थान में कभी 2500 रुपए किलो बिकती थी यह चमत्कारी चीज, अब 400 रुपए भी नहीं मिलते, जानिए इसकी बड़ी वजह

Barmer News: जैविकता और गुणवत्ता घटने से लोग कुमट के गोंद को कम पसन्द करने लगे हैं। बिना इंजेक्शन का गोंद 25 सौ रुपए प्रतिकलो बिक जाता है, वहीं इंजेक्शन वाले गोंद के खरीददार चार सौ के भाव से भी नहीं खरीदते।

2 min read
Google source verification
Medicinal Kumt Gum

पत्रिका फोटो

विपिन भंसाली
राजस्थान के रेगिस्तान में बहुतायत के साथ बिकने वाले औषधीय कुमट के गोंद का उत्पादन बढ़ाने के लिए इंजेक्शन लगाए जा रहे है। इस इंजेक्शन से उत्पादन तो बढ़ रहा है, लेकिन गुणवत्ता घट रही है।

जानकार लोग अब कुमट लगे गोंद के 400 रुपए प्रति किलोग्राम ही दे रहे हैं, जबकि बिना इंजेक्शन का गोंद 2500 रुपए प्रति किलोग्राम है। ठगी अनजान और शहरी कल्चर के ग्राहकों के साथ होने लगी है। अप्रेल व मई तथा सितम्बर-अक्टूबर महीनों में वर्ष में दो बार गोंद का उत्सर्जन होता है।

इंजेक्शन से घटी गुणवत्ता

राजस्थान में प्राकृतिक एवं शुद्ध गोंद की कीमत हर वर्ष बढ़ रही है, लेकिन गोंद का उत्पादन बढ़ाने के लिए पेड़ों में इंजेक्शन लगाकर गोंद निकालने के कारण इसकी गुणवत्ता घटने लगी। तने में इंजेक्शन लगाने से यह पेड़ दो से तीन गुणा अधिक गोंद उत्सर्जित कर लेता है।

ऐसे में अब जैविकता और गुणवत्ता घटने से लोग इसे कम पसन्द करने लगे हैं। बिना इंजेक्शन का गोंद 25 सौ रुपए प्रतिकलो बिक जाता है वहीं इंजेक्शन वाले गोंद के खरीददार चार सौ के भाव से भी नहीं खरीदते।

आयुर्वेद में महत्व

कुमट के पेड़ से निकलने वाला गोंद औषधीय गुणों की खान है। सर्दी में गोंद से बनाए जाने वाले लड्डू गुणकारी माने जाते हैं। आयुर्वेद मानता है कि गोंद प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होने के कारण इसका सेवन कई बीमारियों को दूर करने, हड्डियों को मजबूती प्रदान करने के साथ ही केल्शियम को स्थिर बनाता है।

बहुतायत में हैं कुंभट के पेड़

राजस्थान के धनाऊ, आलमसर, ईटादा, कोनरा, आंटिया, कापराऊ, नेतराड़, बींजासर, भोजारिया, रमजान की गफन, रतासर, बीजराड़, नवातला, बूठ राठौड़ान, गंगाला, खारिया राठौड़ान, सहित बाखासर के हाथला, रामपुरा, भलगांव, एकल, भाड़ा, नवापुरा अरटी आदि गांवों में पेड़ बहुतायत में हैं।

यह वीडियो भी देखें

प्रसूताओं के लिए उपयोगी

प्रसूता महिलाओं को प्रसव के बाद कातीरा (कुमट) गोंद का सेवन करवाया जाता है, यह महिलाओं की रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है। स्तनपान के लिए दूध को बढ़ाने में भी मदद मिलती है, कब्ज में गोंद कतीरा खाने के फायदे बहुत हैं। यह सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार की परेशानी तथा पेट में इंफेक्शन के खतरे को भी कम करता है। इसके सेवन से थकान, कमजोरी, चक्कर आना, उल्टी और तनाव को कम करता है।

यह भी पढ़ें- राजस्थान के 45,537 गांव 29 जनवरी को रहेंगे बंद! शहरों में नहीं पहुंचेगा दूध, सब्जी और फल; जानें क्यों?

बड़ी खबरें

View All

बाड़मेर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग

शिवशक्ति जसदेर धाम में उमड़ रही है श्रद्धालुओं की भीड़ बाड़मेर। शहर के शिवशक्ति जसदेर धाम में महाशिवरात्रि और प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर सात दिवसीय शिव महापुराण कथा में श्रद्धालुओं में अपार उत्साह देखने को मिल रहा है। कथा का वाचन करते हुए पांचवे दिन साध्वी सत्यसिद्धा गिरी ने श्रद्धालुओं को गहन आध्यात्मिक संदेश देते हुए कहा कि शिव महापुराण कथा का श्रवण अमोघ फलदायी है। यह जन्म जन्मांतर के पापों का नाश करता है। मोक्ष, ज्ञान, सुख और समृद्धि प्रदान करता है। श्रद्धापूर्वक कथा सुनने से असाध्य रोग, संतानहीनता और भाग्यहीनता दूर हो जाती है। यह मन को शुद्ध करती है, भक्ति भाव बढ़ाती है और साधक को शिवलोक प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। शिव तत्व की व्याख्या करते बताया कि हिंदू दर्शन, विशेषकर शैव मत में शिव तत्व परम चेतना, शुद्ध ऊर्जा और निराकार ईश्वर का मूल सिद्धांत है। यह समय, स्थान तथा पंचतत्वों से परे है और सृजन विनाश का आधार है। शिव तत्व हर प्राणी में व्याप्त निर्गुण आत्मा है, जो शाश्वत आनंद और अहं चेतना का स्वरूप है। रामपुरी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि ईश्वर का नाम जप और सद्कर्मों के मार्ग पर चलकर ही जीवन का उद्धार संभव है। उन्होंने सभी भक्तों से महाशिवपुराण कथा का श्रवण करने का आह्वान किया तथा युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया। 15 फरवरी शिवरात्रि को रुद्राभिषेक, मूर्तियां प्राण प्रतिष्ठा एवं भव्य रात्रि जागरण में प्रसिद्ध भजन गायक कालु सिंह गंगासरा, कुंभाराम कुम्भवाणी, रणवीर सिंह राठौड सहित कई कलाकार प्रस्तुति देंगे। मीडिया प्रभारी हरिसिंह राठौड ने बताया कि पांचवें दिन की कथा के दौरान स्वामी प्रतापपुरी महाराज के शिष्य रामपुरी महाराज, सावल पुरी, बलदेव पुरी महाराज तारातरा, जेठपुरी महाराज, हुकमपुरी महाराज, नरेंद्र पुरी और संतोष पुरी का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ। कथा में दीपक कडवासरा, कैलाश कोटडिया, पवन ऐचरा, अर्जुन सिंह महेचा, पदम सिंह भियाड, नारायण सिंह गोगादेव, पृथ्वीसिंह महेचा, भुरसिंह दोहट, लूणाराम माली, दीपक माली, कालु माली, उगम सिंह सोलंकी, मोहन लाल माली, रमेश कुमार शर्मा, नवीन कुमार शर्मा, धनश्याम जागिड, दुर्गाराम राव

शिवशक्ति जसदेर धाम में उमड़ रही है श्रद्धालुओं की भीड़ बाड़मेर। शहर के शिवशक्ति जसदेर धाम में महाशिवरात्रि और प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर सात दिवसीय शिव महापुराण कथा में श्रद्धालुओं में अपार उत्साह देखने को मिल रहा है। कथा का वाचन करते हुए पांचवे दिन साध्वी सत्यसिद्धा गिरी ने श्रद्धालुओं को गहन आध्यात्मिक संदेश देते हुए कहा कि शिव महापुराण कथा का श्रवण अमोघ फलदायी है। यह जन्म जन्मांतर के पापों का नाश करता है। मोक्ष, ज्ञान, सुख और समृद्धि प्रदान करता है। श्रद्धापूर्वक कथा सुनने से असाध्य रोग, संतानहीनता और भाग्यहीनता दूर हो जाती है। यह मन को शुद्ध करती है, भक्ति भाव बढ़ाती है और साधक को शिवलोक प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। शिव तत्व की व्याख्या करते बताया कि हिंदू दर्शन, विशेषकर शैव मत में शिव तत्व परम चेतना, शुद्ध ऊर्जा और निराकार ईश्वर का मूल सिद्धांत है। यह समय, स्थान तथा पंचतत्वों से परे है और सृजन विनाश का आधार है। शिव तत्व हर प्राणी में व्याप्त निर्गुण आत्मा है, जो शाश्वत आनंद और अहं चेतना का स्वरूप है। रामपुरी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि ईश्वर का नाम जप और सद्कर्मों के मार्ग पर चलकर ही जीवन का उद्धार संभव है। उन्होंने सभी भक्तों से महाशिवपुराण कथा का श्रवण करने का आह्वान किया तथा युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया। 15 फरवरी शिवरात्रि को रुद्राभिषेक, मूर्तियां प्राण प्रतिष्ठा एवं भव्य रात्रि जागरण में प्रसिद्ध भजन गायक कालु सिंह गंगासरा, कुंभाराम कुम्भवाणी, रणवीर सिंह राठौड सहित कई कलाकार प्रस्तुति देंगे। मीडिया प्रभारी हरिसिंह राठौड ने बताया कि पांचवें दिन की कथा के दौरान स्वामी प्रतापपुरी महाराज के शिष्य रामपुरी महाराज, सावल पुरी, बलदेव पुरी महाराज तारातरा, जेठपुरी महाराज, हुकमपुरी महाराज, नरेंद्र पुरी और संतोष पुरी का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ। कथा में दीपक कडवासरा, कैलाश कोटडिया, पवन ऐचरा, अर्जुन सिंह महेचा, पदम सिंह भियाड, नारायण सिंह गोगादेव, पृथ्वीसिंह महेचा, भुरसिंह दोहट, लूणाराम माली, दीपक माली, कालु माली, उगम सिंह सोलंकी, मोहन लाल माली, रमेश कुमार शर्मा, नवीन कुमार शर्मा, धनश्याम जागिड, दुर्गाराम राव