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फिल्मी पर्दे पर भले ही प्यार के लिए समर्पण की कहानियां गढ़ी जाती रही हों लेकिन हकीकत में कोई इस तरह प्यार निभाए बहुत कम ही सुना है। जिससे प्यार किया उसकी किडनियों ने जवाब दे दिया तो भी नहीं छोड़ा। परिजनों के हजारों सवालों का मुकाबला कर लव मैरिज की। बाद में ट्रांसप्लांट की गई एक किडनी के सहारे जीवन बीता रहे पति की यह किडनी भी खराब हो गई तो पत्नी ने अपनी किडनी दे दी। गत 6 फरवरी को पति डॉ. ओम को किडनी ट्रांसप्लांट की गई। मंगलवार सुबह ( 14 फरवरी को) पत्नी डॉ. स्नेहा मुस्कराते हुए हैप्पी वेलेन्टाइन कहेगी।
बाड़मेर के रहने वाले ओमप्रकाश डूडी का चयन एमबीबीएस में हुआ था। 2003 में महाराष्ट्र के शौलापुर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां अपनी सहपाठी शौलापुर महाराष्ट्र निवासी स्नेहा से उनका मिलना हुआ। दोनों के विचार मिले और 2005 में प्यार हो गया। दोनों ने तय कर लिया कि अब जीना-मरना संग-संग ही होगा। दोनों के परिजनों को भी इससे कोई एेतराज नहीं था। साल 2006 में डॉ. ओमप्रकाश की तबीयत बिगड़ी और डॉक्टर्स ने कहा कि उनकी किडनियां खराब है। स्नेहा के परिजनों ने बेटी के भविष्य की बात कर उसे रोकना चाहा लेकिन स्नेहा ने कहा कि यदि उसकी तबीयत बिगड़ जाती तो क्या ओम एेसा करते? इस दौरान 2007 में डॉ. ओम के एक किडनी का ट्रांसप्लांट हुआ जो उनकी मां ने दी थी। स्नेहा ने प्यार का वादा निभाते हुए 2009 में डॉ. ओम से लव मैरिज कर ली। सबकुछ ठीक चल रहा था। डॉ. ओमप्रकाश राजकीय अस्पताल बाड़मेर में मनोचिकित्सक नियुक्त हो गए और डॉ. स्नेहा भी शिवकर (बाड़मेर) अस्पताल में चिकित्सक। इनके एक बेटी भी हुई, लेकिन पिछले दिनों फिर डॉ. ओम की तबीयत बिगड़ी और उन्हें उपचार को गुजरात ले गए। जहां उनकी किडनी खराब होने की जानकारी दी गई।
दिल दिया और किडनी भी
डॉ. स्नेहा ने तय किया कि अब अपने सुहाग पर आए संकट के लिए वह खुद आगे आएंगी। स्नेहा ने 6 फरवरी को अपने पति डॉ. आेमप्रकाश को किडनी दे दी। पिछले सात दिन से डॉ. ओमप्रकाश अस्पताल में है। डॉ. स्नेहा भी यही दाखिल है। 14 फरवरी को वेलेंटाइन-डे है। स्नेहा की एक किडनी ओम के शरीर में है और दोनों मोबाइल पर बात करते हुए वेलेंटाइन वीक में यह कहते हुए खुश है कि उनकी प्यार की कहानी दुनियां में सबसे निराली है।
यह सुपरहिट लवस्टोरी है
ओम और स्नेहा मेरे मित्र हैं। इन दोनों ने पिछले तेरह साल में अपने प्यार को इस कदर निभाया है कि इसे एक सुपरहिट लवस्टोरी कह सकते हैं। स्नेहा ने वादा नहीं तोड़ा। ओम ने भी उसका पूरा साथ दिया। इस वेलेंटाइन को तो स्नेहा ने जो प्यार के लिए किया है एेसे उदाहरण तो बहुत ही कम मिलते हैं। सेल्यूट करने को दिल चाहता है।- डॉ. भरत सारण
मैने कमिटमेंट किया था
हमने एक दूसरे का जीवन भर साथ निभाने का वादा किया था। जब एक दूसरे के दिल से हो गए तो फिर पीछे कैसे हट सकते है। प्यार एक अहसास है और उसमें विश्वास होता है। हमने उसी को निभाया है। मेरी जिंदगी जिससे जुड़ी है, उसके लिए तो जीवन का हर क्षण समर्पण है।- डॉ. स्नेहा
Published on:
18 Feb 2017 04:32 pm
