
1008 कुंडीय हनुमत महायज्ञ (फोटो- पत्रिका)
जयपुर: श्रीराम जयराम जय जय राम, सियावर रामचंद्र की जय…का उदघोष, वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज, यज्ञ वेदी से उठती धूप की सुगंध। यह नजारा शुक्रवार को सीकर रोड स्थित नींदड़ में आयोजित दस दिवसीय रामकथा और 1008 कुंडीय हनुमत महायज्ञ की पूर्णाहुति के दौरान देखने को मिला।
इसकी साक्षी बनीं देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु्, जिन्होंने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य की मौजूदगी में देश की समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ यज्ञ में विधिपूर्वक आहुति दी। साथ ही यज्ञशाला की परिक्रमा भी की।
रामानंद मिशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य की अगुवाई में समापन हुआ। राष्ट्रपति मुर्मु दोपहर 2.40 बजे एयरपोर्ट पहुंचीं और करीब दो घंटे बाद नई दिल्ली लौट गईं। इस दौरान राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहे। राष्ट्रपति मुर्मु ने स्वामी रामभद्राचार्य का सम्मान किया।
तय कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति दोपहर 3.20 बजे कथा स्थल पहुंची। यहां राज्यपाल बागडे, मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा ने स्वागत किया। एयरपोर्ट से वे यज्ञशाला पहुंचीं। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने भी राष्ट्रपति का स्वागत किया।
इससे पहले राष्ट्रपति के जयपुर एयरपोर्ट पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनकी अगवानी की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी, डॉ. प्रेमचंद बैरवा, सांसद मदन राठौड़, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
आयोजन समिति के सदस्य अनिल संत ने बताया कि प्रदेशभर से भक्त कथा श्रवण के लिए जयपुर पहुंचे। इस दौरान भक्तों का हुजुम दूर-दूर तक नजर आया। वहीं धार्मिक वातावरण, मंत्रोच्चार और यज्ञ की आहुतियों के बीच नींदड़ क्षेत्र में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस दौरान सीकर रोड पर अयोध्या जैसा नजर आया। भक्तों ने कहा कि शहर में यह आयोजन धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा।
स्वामी रामभद्राचार्य ने कथा में कहा कि यह यज्ञ एक करोड़ 40 लाख लोगों को पुण्य दिलवाएगा। इतना बड़ा उत्सव पहले कभी न राजस्थान में हुआ, न भारत में हुआ। मैं देश की उन्नति के लिए 29 जून 2026 से 13 जनवरी 2027 तक बंद कमरे में कंदमूल और दुग्ध आहार ही लेकर तपस्या करूंगा।
उन्होंने कहा कि हनुमान जैसा वैराग्यवान कोई नहीं है। उनका संसार के परिवार से किसी कोई राग नहीं है। विवाह ही नहीं हुआ तो राग कैसा। हनुमान जी ने आठ लोगों को जीवन दान दिया। इनमें वानर राज सुग्रीव को दो बार, वानरों को दो बार, लक्ष्मण जी को दो बार, सीताजी को एक बार, भरत को एक बार। बुद्धि के आठ गुण होते हैं।
राष्ट्रपति के दौरे के चलते सीकर रोड पर नींदड से लेकर, टोल टैक्स और 14 नंबर पुलिया तक यातायात जाम रहा। इस कारण आमजन को कुछ जगह परेशानी हुई। 14 नंबर पुलिया से भवानी निकतेन पहुंचने में 40 मिनट से अधिक समय लगा।
Updated on:
17 Jan 2026 01:04 am
Published on:
17 Jan 2026 01:01 am
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