
Year of expectation 2018 firstday commenced with initiative of patrika
बाड़मेर. बाड़मेर के धोरों ने नए साल में फिर नई उम्मीदों के गीत गुनगुनाए हैं। बरसों से उपेक्षित यह मरूस्थलीय जिला तेल की धार से ऐसा चमका कि प्रदेश, देश से लेकर विदेश तक डंका बजा दिया। बीते वर्ष 2017 में आमजन की विभिन्न समस्याओं के समाधान, विकास के वादे जनप्रतिनिधियों व अफसरों ने खूब किए। लेकिन, महज आश्वासनों के घूंट ही मिले। अब नए वर्ष में नई उम्मीद जगी है। सुबह की नई रश्मियों से थारवासी आनंदित है और इन नई किरणों में नई रोशनी की बाट जोह रहे हैं। साल के पहले माह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहां रिफाइनरी का शिलान्यास करने आ रहे हैं, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई है क्योंकि यह थार की किस्मत बदलने का सबसे अच्छा मौका है बशर्ते नेताओं के वादे धरातल पर सच साबित हों। बालोतरा को जिला बनाने की बरसों की मांग को भी उम्मीद के नजरिए से देखा जा रहा है। मेडिकल कॉलेज, पेयजल व सड़क परियोजनाएं पूर्णता की तरफ बढ़ेगी, आस है।
पत्रिका की पहल, पाठकों की लेखनी से शुरू पहला दिन
कुछ कविताएं अच्छी लिखते हैं तो कुछ शेरो-शायरियां। अफसोस कि उन्हें मंच नहीं मिलता। पत्रिका ने ऐसी प्रतिभाओं को मौका दिया है नववर्ष के पहले दिन। आज के अंक में पत्रिका के पाठकों की ओर से रचित कविताओं व अन्य लेखों का प्रकाशन किया जा रहा है। इस पहल का सुधि पाठकों ने इस तरह स्वागत किया कि रचनाओं में से बेहतरीन टटोलना भी मुश्किल सा हो गया। वाट्सएप, फेसबुक के अलावा ई-मेल के भी ढेर लग गए। हर वर्ग ने इसमें भागीदारी निभाई। चुनिंदा रचनाएं प्रकाशित की जा रही है। अन्य बेहतरीन लेखकों के नाम प्रकाशित किए जा रहे हैं।
नया वर्षं - कविता
सब हर्षं में है कि आज एक जनवरी को
नया वर्षं हैं,
माह, तिथि, दिन, घंटे, पल गुजर गए,
फि र आज नया वर्षं हैं,
पर सच तो हैं,कि कल फि र वही वक्त,
वही दिवस,वही दिशा,वही आकाश,वही धरा होगी,
और वक्त की वहीं रफ्तार होगी जो थी कल!
सोचता हूं फि र क्या नया वर्षं और क्या पुराना हैं!
अंतस से निकलता हैं प्रत्युत्तर "-
शायद खूटी मानसिकता का बदलना
और अपराधबोध का मिटना ही नया वषज़् होगा,
बिल्कुल नया!
नया हो तो बस दरिंदगी,दगाबाजी, लूट,
हत्या, चोरी, शोषण का अंत हो!
नया हो तो कुव्यवस्था का अवसान
और सदाचार का उदय,
बस यहीं हो नया वर्षं!
पर मलाल है कि ऐसा नया वर्ष न जाने कब होगा!!!!
नरपत दान बारहठ,(राजकीय वरिष्ठ शिक्षक)भींयाङ, बाङमेर
नववर्ष भैया आ भी जाओ।
जोश, उत्साह, उमंग ले आओ।।
साल 2017 अब तुम जाओ।
कुछ यादें तुम छोड़ कर जाओ।।
-गजराज दर्जी, सोहड़ा
यादों का समन्दर बीते साल-2017 का कुछ अनूठा ही रहा है।
कुछ नए मिले हमराही, कुछ की विदाई से ये शहर सूना हुआ है।।
एकजुट होकर मनाए कई तीज-त्योहार हमने।
रंजिशें मिटाकर आपसी, बनाया मीठी यादों का हार हमने।।
आने वाले साल में दृढ़ प्रतिज्ञा करें।
इन लघु पंक्तियों को जनमानस के हृदय में भरें।।
-ममता शर्मा 'तरिणी'
-इनकी रचनाएं भी मिली
वेदाराम, भादवा-सिवाना, जस्सी सोलंकी बाड़मेर,
सर्दी, गर्मी ,बरसात,चंद उम्मीदें, चंद सवाल।
कुछ आशा, कुछ सपने, कुछ नई पहचान देकर।।
यह साल जा रहा है।
यह साल जा रहा है।।
कुछ बिछड़े तो कुछ बने अपने।
पूरे हुए ख्वाब तो बुने नए सपने।।
गलतियों से सबक सीखा है हमने।
मेहरबानियां हम पर की हमेशा रब ने।।
- स्वाति मानधना, बालोतरा
कविता --
मालाणी री माँद माथे,
मोती जगमगावेला !
झोली भर दामन माय,
मनवार 2018 लावेला !
खुशियाँ बोले मुख सु,
रिफ ाइनरी बैगी लागेला!
मैडिकल कोलेज रे कारणे,
युवा मन छावेला!
किसानाँ री झोली माँय,
धन रो मेह हौवेला !
आज सैगा रा मुखङा तो,
हैप्पी न्यू ईयर,हैप्पी न्यू ईयर धावेला!!
- अरविन्द कुमार, पूजांसर
Published on:
01 Jan 2018 10:56 am

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