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विशाल रैली निकाल रसोइया ने कहा कूली-मजदूरी से भी खराब कट रही जिंदगी, पढ़ें खबर

एक सूत्रीय मांग को लेकर बेमियादी हड़ताल, संघ पदाधिकारी ने बताया कि कहने को है सरकारी नौकरी लेकिन आर्थिक स्थिति कूली-मजदूरी से भी है बद्तर।

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रसोइया ने कहा कूली-मजदूरी से भी खराब कट रही जिंदगी

रसोइया ने कहा कूली-मजदूरी से भी खराब कट रही जिंदगी

कोण्डागांव. छततीसगढ़ महिला पुरूष मध्याहन भोजन रसोईया संघ के बैनर तले जिला मुख्यालय में रसोईयों ने बुधवार को प्रदर्शन किया। रसोईयों ने अपनी एक सूत्रीय मांग को लेकर बेमियादी हड़ताल पर जाने की बात कही। संघ से जुड़े जिलेभर के रसोईयों के रूप में काम कर रहे लोगों ने बताया कि वे न्यूनतम मानदेय पर सालों से काम कर रहे हैं। बावजूद इसके न तो मानदेय में कोई बढ़ोत्तरी की गई और न ही रसोईयों को उनके कार्य के आधार पर नियमित किया गया हैं। इसके कारण रसोईया अब उग्र प्रदर्शन करने को उतारू हो गयें हैं।

शासन ने नहीं उठाया कोई ठोस कदम
संघ के जिलाध्यख गोवर्धन पटेल ने बताया कि मानव संसाघन मंत्रालय के अंतर्गत प्रायमरी एवं पूर्व माध्यमिक शाला में वर्श 1995 से कार्यरत रसोईयों को मानदेय पर नियुक्त किया गया पर अब तक नियमितीकरण नहीं किया गया हैं। इस सबंध में कई दफे शासन-प्रशासन को अपनी जायज मांगों के लेकर आवेदन कर चुके है पर अब तक शासन से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब तक केवल अधिकारी व नेता अश्वासन ही देते आ रहे हैं।

नारेबाजी के साथ निकाली रैली
आक्रोशित हो चुके रसोईयों ने स्थानीय चौपाटी परिसर में सभा की जहां संघ के पदाधिकारियों ने अपनी बाते रखी। सभा के बाद विशाल रैली निकाली गई जो एक किलोमीटर से भी अधिक लंबी रही। जिसमें सैकड़ो रसोईया शामिल हुये। यह रैली चौपाटी से शुरू होकर कलक्टर कार्यालय पहुंची जहां मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा गया। रैली में शामिल संघ के लोग अपनी जायज मांग का हवाला देते हुये जमकर नारेबाजी करते रहे। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस भी चौकन्नी रही और उनके साथ-साथ ही चलती रही।

कहा नहीं सुधरी आर्थिक स्थिति
पदधिकारियों ने बताया कि वे कहने को तो सरकारी तौर पर काम कर रहे है, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति कूली-मजदूरी करने वालों से बद्त्तर हो गई हैं। सुबह से शाम तक काम करने के बाद भी मेहताना कम ही मिलता हैं। स्कूल में केवल रसोईया ही नहीं बल्कि प्यून के साथ ही कभी-कभी स्कूल की बागडोर भी संभालनी पड़ती हैं। बावजूद इसके रसोईयों को अब तक न तो मानदेय में कोई खास बढ़ोत्तरी की गई और न ही नियमित किया गया हैं।