कई मामलों में तो एक से दो दिन में ही रकम 30 हजार तक पहुंच जाता है जबकि उस हिसाब की यहां सुविधा ही नहीं है। फिर मामला बिगड़ता है तो उन्हें बाहर ले जाने की सलाह दे दी जाती है। तब तक मरीज की अच्छी तरह जेब कट चुकी होती है।लगातार निजी अस्पताल में विशेषज्ञ न सुविधाएं और खासी रकम वसूला जा रहा है।
जो विशेषज्ञ पहुंच रहे हैं, वह भी सरकारी अस्पताल के हैं।