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अब राजस्व और नजूल की जमीनों को फ्री होल्ड नहीं कराया जा सकेगा

म.प्र भू राजस्व संहिता अधिनियम में संसोधन के कारण लगी रोक, अब हर साल भरना पड़ेगा प्रीमियम और कराना पड़ेगा पट्टे का नवीनीकरण

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बैतूल. म.प्र भू राजस्व संहिता १९५९ के अधिनियम में संशोधन २०१८ के तहत धारा १७२(क) का लोप कर दिए जाने से अब राजस्व एवं नजूल की जमीनों को फ्री होल्ड नहीं कराया जा सकेगा। एक्ट में हुए इस संशोधन के कारण करीब एक दर्जन लोगों के प्रकरण निरस्त हो गए हैं। बताया गया कि पट्टेधारकों को सालाना प्रीमियम राशि दिए जाने के अलावा लीज समाप्त होने पर पट्टे का नवीनीकरण भी करना होगा। यदि समय पर प्रीमियम नहीं भर जाता है तो जुर्माना भी लगेगा। चंूकि जमीन फ्री होल्ड हो जाने से पट्टेधारकों को सालाना प्रीमियम नहीं देना पड़ता था और जमीन पर उनका मालिकाना हक भी निर्मित हो जाता था लेकिन शासन द्वारा एक्ट में संशोधन किए जाने से पट्टेधारकों को इस सुविधा से वंचित होना पड़ गया है।

प्रकरण 01- गंज चुन्नीढाना में रहने वाले गजानंद सिरासाव ने जमीन फ्री होल्ड कराने के लिए प्रकरण एसडीएम न्यालय में डाला था लेकिन दो महीने तक मामले में कोई सुनवाई नहीं हुई उल्टे उन्हें रिकवरी के लिए साढ़े आठ लाख का नोटिस जारी कर दिया गया था। जिसके चलते उन्होंन कमिश्नर के यहां अपील की है। अब प्रकरण में कमिश्नर कार्यालय होशंगाबाद में सुनवाई चल रही है।

हर साल भरना पड़ेगा टैक्स
अधिनियम में संशोधन के बाद फ्री होल्ड की प्रक्रिया को समाप्त कर दिए जाने के बाद शहर में मौजूद एक हजार से अधिक पट्टेधारकों को अब हर साल जमीन की प्रीमियम भरना पड़ेगा। वहीं लीज समाप्त होने पर पट्टे का नवीनीकरण भी करना पड़ेगा। चूंकि दोनों की प्रक्रिया काफी पेचिदा है इसलिए ज्यादातर पट्टेधारकों द्वारा जमीन को फ्री होल्ड कराए जाने के लिए राजस्व कार्यालय में आवेदन लगाए थे, लेकिन शासन द्वारा २५ सितंबर २०१८ से एक्ट में संसोधन किए जाने के कारण ज्यादातर लोगों के प्रकरण लंबित हो गए हैं। बताया गया कि पूर्व में कई पट्टेधारकों द्वारा समय पर प्रीमियम नहीं भरे जाने के कारण प्रशासन द्वारा लाखों रुपए के नोटिस भी जारी किए गए थे।जिससे पट्टेधारकों में हडक़ंप मच गया था।

क्या है लीज होल्ड
राजस्व विभाग एवं रीयल एस्टेट में लीज होल्ड और फ्री होल्ड शब्द काफी अहम होते हें। ये प्रॉपर्टी के टाइटल से संबंधित होते हैं। यानी प्रॉपर्टी के मालिकाना हक की स्थिति को दर्शाते हैं। लीज होल्ड और फ्री होल्ड टाइटल सभी तरह की प्रॉपर्टी पर लागू होते हैं। लीज होल्ड प्रॉपटी से मतलब है कि प्रॉपर्टी का मालिकाना हक कुछ समय के लिए ही खरीदार को ट्रांसफर किया जाता है। आमतौर पर ३० एवं ९९ साल की लीज दी जाती है। यह समय-सीमा पूरी होने के बाद मालिकाना हक दोबारा से पहले पक्ष के पास चला जाता है।

क्या है फ्री होल्ड
फ्री होल्ड प्रॉपर्टी का मतलब होता है कि प्रॉपर्टी का मालिकाना हक हमेशा के लिए खरीददार के पास होता है। बैतूल जिले में ज्यादातर प्रॉपर्टी फ्री होल्ड है हालांकि कुछ जगहों पर राजस्व एवं नजूल विभाग की लीज होल्ड प्रॉपर्टी भी है। इनमें शहर का कोठीबाजार एवं गंज क्षेत्र शामिल है जहां सालों से लीज पर पट्टेधारी काबिज है। कुछ पट्टेधारकों ने अपनी जमीनें फ्री होल्ड करा ली है लेकिन ज्यादातर लोग फ्री होल्ड कराने के लिए विभाग के चक्कर काट रहे हैं। चूंकि अब म.प्र भू राजस्व संहिता एक्ट में संशोधन हो गया है इसलिए फ्री होल्ड कराने की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है।

फ्री होल्ड के यह होते हैं फायदें
1. लीज होल्ड प्रॉपर्टी को फ्री होल्ड होने से क्लियर टाइटल यानी पूर्ण मालिकाना हक मिलता है।
2. फ्री होल्ड प्रॉपर्टी के इस्तेमाल में किसी प्रकार की कोई बंदिश नहीं होती है।
3. बैंक से होम लोन और रिनोवेशन लोन आसानी से मिल जाता है।
4. यदि लीज होल्डर की मौत हो जाए तो भी मालिकाना हक को लेकर कोई समस्या नहीं आती है।
5.प्रॉपर्टी की रिसेल कीमत बढ़ जाती है क्योंकि मार्केट में हमेशा लीज होल्ड की अपेक्षा फ्री होल्ड प्रॉपर्टी की कीमत अधिक होती है।

इनका कहना
- शासन ने भूराजस्व संहिता एक्ट में संशोधन कर दिया है जिसके कारण 25 सितंबर के बाद से फ्री होल्ड की प्रक्रिया को बंद कर दिया गया है। हमारे पास दस करीब प्रकरण है जिन पर सुनवाई चल रही है।
- सीएल चनाप, एसडीएम बैतूल।