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ग्राम ढाबा में निर्माणधीन स्कूल भवन का हिस्सा तोडऩे से गरमाई सियासत

Part of the school under construction in village Dhaba was demolished.

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बैतूल। जिले के भैंसदेही ब्लॉक अंतर्गत ग्राम ढाबा में निर्माणाधीन स्कूल भवन का कुछ हिस्सा तोड़े जाने के बाद सियासत तेज हो गई है। स्थानीय स्तर से शुरू हुआ यह मामला अब प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंच गया है। प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए विपक्षी दलों ने इसे मनमानी और भेदभावपूर्ण करार दिया है, जबकि प्रशासन नियमों के तहत कार्रवाई की बात कह रहा है।
ग्राम ढाबा में अब्दुल नईम द्वारा स्कूल भवन का निर्माण कराया जा रहा था। पंचायत और प्रशासन ने इसे बिना अनुमति का निर्माण बताते हुए जेसीबी से भवन के कुछ हिस्से को 13 जनवरी की शाम को गिरा दिया। यह कार्रवाई एसडीएम अजीत मरावी के नेतृत्व में की गई। पंचायत अधिनियम की धारा 55 के तहत कार्रवाई की गई। घटना के बाद ग्राम ढाबा सहित पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है। कार्रवाई के बाद मामला राजनीतिक रंग लेने लगा है।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने सोशल मीडिया के जरिए इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि ऊपर से दबाव बताकर स्कूल तुड़वाया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री से भी हस्तक्षेप की अपील की और सवाल किया कि क्या अब शिक्षा से जुड़े कार्यों को भी रोका जाएगा।
एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस कार्रवाई को लेकर कहा कि स्कूल बनाने की पहल करने वाले व्यक्ति को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह मुसलमान है। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि शिक्षा के प्रयासों को कुचलना समाज के लिए घातक है और इससे सबसे ज्यादा नुकसान गरीब, दलित और आदिवासी बच्चों को होगा।
कांगे्रस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने अपने ट्वीट में लिखा कि बैतूल में अब्दुल नईम ने अपने खर्च पर गांव के बच्चों के लिए स्कूल बनाया था, जिसे भाजपा सरकार ने गिरा दिया। उन्होंने इसे शिक्षा विरोधी मानसिकता का उदाहरण बताते हुए कहा कि सरकार को ऐसी पहल को प्रोत्साहित करना चाहिए था, न कि उसे ध्वस्त करना। कांग्रेस अध्यक्ष निलय डागा भी पीडि़त के गांव पहुंचे। घटना को लेकर चर्चा की और भाजपा को कोसा।
मामले को लेकर कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की गई है और इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया। ग्राम पंचायत की अनुमति के बिना किया गया निर्माण हटाया गया है।