
बैतूल। कोठीबाजार बस स्टैंड के समीप जिला पंचायत द्वारा निर्मित आजीविका प्लाजा की 21 दुकानों की नीलामी फिलहाल अधर में लटक गई है। 30 जनवरी को प्रस्तावित नीलामी अपेक्षित बोली प्रस्ताव नहीं मिलने के कारण निरस्त कर दी गई। यह स्थिति जिला पंचायत की नीतिगत सोच, बेस प्राइज निर्धारण और जमीनी हकीकत से कटे फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 23 जनवरी को पत्रिका ने कोठीबाजार में आजीविका कॉम्प्लेक्स तैयार, महंगे किराये से गड़बड़ा सकता है नीलामी का गणित शीर्षक से खबर प्रकाशित कर संभावित असफलता की ओर इशारा किया था। ठीक वैसा ही हुआ जिस आशंका को व्यापारियों ने पहले जताया था, वही नीलामी के दौरान सामने आ गई।
बेस प्राइज बनी सबसे बड़ी बाधा
जिला पंचायत द्वारा दुकानों की नीलामी 20, 25, 32 और 39 लाख रुपए की बेस प्राइज से शुरू की जानी थी। व्यापारियों और निवेशकों का कहना है कि बैतूल जैसे शहर में, जहां बाजार की क्रय-क्षमता सीमित है, वहां इतनी ऊंची शुरुआती कीमत पर बोली लगना व्यावहारिक रूप से असंभव है। छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए यह राशि उनकी पहुंच से बाहर है, जबकि बड़े निवेशक भी संभावित रिटर्न को लेकर आशंकित नजर आए।
किराया और कीमत दोहरी मार
नीलामी की शर्तों में केवल दुकान की कीमत ही नहीं, बल्कि मासिक किराया वसूलने का भी प्रावधान रखा गया है। व्यापारियों के अनुसार यह किराया भी लाखों रुपए सालाना तय किया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब एक व्यापारी पहले ही लाखों रुपए निवेश कर रहा है, तो उस पर लगातार किराये का अतिरिक्त बोझ क्यों डाला जा रहा है। इस दोहरी मार ने निवेशकों को नीलामी से दूर कर दिया। कई व्यापारियों का साफ कहना है कि इतनी बड़ी राशि दुकान में लगाने की बजाए बैंक या अन्य सुरक्षित निवेश विकल्पों में पैसा लगाना अधिक लाभकारी और जोखिम मुक्त है। बाजार की अनिश्चितता, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सीमित ग्राहक आधार को देखते हुए आजीविका प्लाजा में व्यापार से होने वाला मुनाफा संदेह के घेरे में आ गया है।
नीति बनाम ज़मीनी हकीकत
यह पूरा मामला जिला पंचायत की उस नीति को उजागर करता है, जिसमें योजनाएं तो बड़ी बनाई जाती हैं, लेकिन स्थानीय बाजार की क्षमता, व्यापारियों की आर्थिक स्थिति और निवेश के व्यवहारिक पहलुओं का पर्याप्त अध्ययन नहीं किया जाता। नतीजा यह हुआ कि जिस आजीविका प्लाजा को रोजगार और व्यापार को बढ़ावा देने का माध्यम बताया गया था, वही आज खुद अपनी आजीविका के लिए जूझता नजर आ रहा है।
प्रशासन का पक्ष
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अक्षत जैन ने नीलामी रद्द होने की पुष्टि करते हुए कहा है कि अपेक्षित बोली नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया निरस्त की गई है और स्थिति की समीक्षा के बाद पुन: नीलामी की तारीख तय की जाएगी। हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुन: नीलामी से पहले बेस प्राइज, किराया और शर्तों में वास्तविक सुधार किया जाएगा या फिर वही पुरानी नीति दोहराई जाएगी।
Updated on:
08 Feb 2026 08:45 pm
Published on:
08 Feb 2026 08:44 pm
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