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दिव्यांग बेच रहा था अपना आखिरी सहारा, सरकार की जगह कबाड़ी आया काम

उसके पास घर जाने तक के पैसे नहीं थे, ऐसे में उसने स्टीक बेचने का फैसला लिया और कबाड़ी की दुकान पर जा पहुंचा, उसे देख कबाड़ी भी हैरान रह गया कि यह आखिर अपने चलने का सहारा भी क्यों बेच रहा है.

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Divyang

बैतूल/मुलताई. मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में एक मानवीय घटना सामने आई है, यहां एक दिव्यांग इलेक्ट्रिक साइकल की आस में शिविर तक तो पहुंच गया, लेकिन जब उसे वहां से साइकल की जगह केवल स्टीक थमा दी, तो वह मुसीबत में पड़ गया, क्योंकि उसके पास घर जाने तक के पैसे नहीं थे, ऐसे में उसने स्टीक बेचने का फैसला लिया और कबाड़ी की दुकान पर जा पहुंचा, उसे देख कबाड़ी भी हैरान रह गया कि यह आखिर अपने चलने का सहारा भी क्यों बेच रहा है, ऐसे में जब उसने दिव्यांग की पीड़ा जानी तो उसे घर पहुंचाने की व्यवस्था करा दी, चूंकि यह दिव्यांग सरकार से सहारे की आस लेकर आया था, लेकिन वहां से मदद नहीं मिलने पर कबाड़ी ही उसका सहारा बना।

विकलांग शिविर में इलेक्ट्रिक साइकल मिलने की सूचना पर निमनवाड़ा से मुलताई पहुंचे एक दिव्यांग को स्टिक थमा दी ऐसी स्थिति में युवक के पास गांव वापस जाने के लिए पैसे नहीं थे तो वह एक कबाड़ की दुकान पर स्टिक बेचने पहुंच गया। कबाड़ बेचने वाले इकबाल ने जब दिव्यांग की मजबूरी देखी तो उन्होंने बिना स्टिक खरीदे गांव पहुंचाने व्यवस्था की।

दिव्यांग दिलीप बालापुरे ने बताया कि वह यह सोच के आया था कि शिविर में उसे इलेक्ट्रिक साइकल मिलेगी तो वह उससे गांव चला जाएगा, लेकिन उसे स्टिक थमा दी। चूंकि उसके पास पैसे नहीं थे, ऐसे में उसके सामने समस्या खड़ी हो गई कि अब वह गांव कैसे जाएगा। उसके पास पैसे नहीं थे और वह अंजान होने से किसी से पैसे भी नहीं मांग पाया। इसलिए स्टिक बेचने कबाड़ की दुकान पर पहुंचा, लेकिन यहां इकबाल ने उसकी मदद की।

इलेक्ट्रिक साइकल के लिए दिया था आवेदन

दिव्यांग दिलीप ने बताया कि उसने बैतूल में इलेक्ट्रिक साइकल के लिए आवेदन किया था। इसके बाद उसे पंचायत सचिव ने जानकारी दी कि सामुदायिक भवन कामथ में विकलांग शिविर में उसे साइकल दी जाएगी । इससे वह जैसे-तैसे मुलताई तक आ गया, लेकिन विकलांग शिविर में उसे स्टिक दी गई जिससे उसके सामने समस्या खड़ी हो गई।

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दिव्यांग को घर भेजने में की सहायता

इधर, गांधी वार्ड में कबाड़ का धंधा करने वाले इकबाल ने बताया कि जब दिव्यांग उनकी दुकान पर आकर स्टिक बेचने कहा तो उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर दिव्यांग अपनी चलने का एकमात्र सहारा क्यों बेचना चाहता है। उन्होंने दिलीप से पूछा कि क्या वजह है कि तुम स्टिक बेच रहे हो, क्योंकि इसके बिना तुम चल नहीं सकोगे तब दिलीप ने उन्हें पूरी बात बताई।

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