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जानिए कैसे विद्युत कंपनी उपभोक्ताओं से वसूली रही अतिरिक्त चार्ज

रीडिंग के दौरान बिल में नहीं जुड़ा फ्यूल चार्ज, अब देना पड़ रही अतिरिक्त राशि

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रीडिंग के दौरान बिल में नहीं जुड़ा फ्यूल चार्ज, अब देना पड़ रही अतिरिक्त राशि

रीडिंग के दौरान बिल में नहीं जुड़ा फ्यूल चार्ज, अब देना पड़ रही अतिरिक्त राशि

बैतूल. विद्युत वितरण कंपनी के मीटर रीडिंग के पूर्व फ्यूल चार्ज (ईंधन प्रभार समायोजन) को नहीं जोडऩे से बिजली बिल भरने के दौरान उपभोक्ताओं को फ्यूल चार्ज का करंट लग रहा है, क्योंकि बिल में दर्शाई राशि और कंपनी के कम्प्यूटर सिस्टम में दर्ज राशि में अंतर आ रहा है। उपभोक्ताओं से बिल में दर्ज कुल राशि से अधिक बिल जमा करना पड़ रहा है। कंपनी द्वारा उपभोक्ता की यूनिट खपत के आधार पर प्रति यूनिट ३ पैसे अतिरिक्त बिल में जोड़ दिए गए है। इस वजह से बिजली जमा करने के दौरान बढ़ी हुई राशि को लेकर काउंटर पर विवाद की स्थिति भी बन रही है।
बिल वितरण बाद जुड़ी फ्यूल चार्ज की राशि
विद्युत कंपनी द्वारा हर महीने की 15 तारीख तक मीटरों की रीडिंग कर बिलों का वितरण कर दिया जाता है। फरवरी महीने में भी कंपनी के मीटर वाचकों द्वारा घर-घर जाकर बिजली बिलों की रीडिंग कर उपभोक्ताओं को मौके पर बिल थमा दिए। बिल जमा करने की अंतिम तारीख ७ फरवरी है। उपभोक्ता बिल लेकर कंपनी के दफ्तर जमा करने पहुंच रहे हैं तो बिजली बिल में दर्शाई गई कुल राशि और कंपनी के कम्प्यूटर में दर्ज राशि में अंतर आ रहा है। यह अंतर प्रति यूनिट के आधार पर आ रहा है। जिसके चलते बिजली बिल में दर्शाई गई राशि से अधिक राशि का भुगतान उपभोक्ताओं से वसूल किया जा रहा है। जिसको लेकर बिजली कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के विवाद की स्थिति भी बन रही है। कंपनी का कहना है कि मीटरों की रीडिंग और बिजली बिलों के वितरण का कार्य पहले कर दिया गया था, लेकिन अचानक फ्यूल चार्ज की राशि में ३ पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोत्तरी होने के कारण बाद में इसे बिजली बिलों में जोड़ा गया। जिसके कारण कंपनी के सिस्टम और बिजली बिलों की रसीद में दर्ज राशि में अंतर दिखाई दे रहा है। हालांकि कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं के कहने पर बिल में दर्ज कुल राशि ले रही है लेकिन अगले महीने के बिजली में शेष राशि जुडक़र आएगी। जिससे उपभोक्ताओं पर दोगुना भार बढ़ेगा।
तीन पैसे प्रति यूनिट बढ़ा दिया फ्यूल चार्ज
विद्युत वितरण कंपनी द्वारा हर तीन महीने के अंतराल से फ्यूल चार्ज (ईंधन प्रभार समायोजन) में फेरबदल किया जाता है। फ्यूल चार्ज की कीमत ईंधन की खपत पर निर्भर करती है। कभी फ्यूल चार्ज कम हो जाता है तो कभी बढ़ा दिया जाता है। पिछले कई महीनों से फ्यूल चार्ज की कीमतें स्थिर थी लेकिन इस महीने फ्यूल चार्ज में प्रति यूनिट ३ पैसे की वृद्धि कर दी गई है। जिसके कारण उपभोक्ताओं को फ्यूल चार्ज का करंट लग रहा है। ईमानदारी से बिजली उपभोग करने वालों पर इसका सीधा भार होगा, क्योंकि बिजली चोरी करने वालों से होने वाली हानि की गणना भी इस चार्ज में शामिल होती है।
विद्युत कंपनी इसलिए वसूलती है फ्यूल चार्ज
विद्युत नियामक आयोग हर साल बिजली खर्च की गणना के बाद बिजली की दरें तय करता है। आयोग फिक्स दर के साथ वेरिएबल दर के हिसाब से टैरिफ निर्धारित करता है। वेरिएबल दर का निर्धारण कोयला, डीजल व परिवहन खर्च से किया जाता है। यह खर्च बिजली खरीदी के दौरान जो दरें आती है, उस आधार पर बनती है। इसकी वूसली बिजली के बिलों में उपभोक्ताओं से वसूल की जाती है।
इनका कहना है
विद्युत नियामक आयोग द्वारा फ्यूल चार्ज में ३ पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोत्तरी की है। तीन महीने में एक बार फ्यूल चार्ज की राशि कम ज्यादा होती है। चूंकि बिलों का वितरण हो चुका था। सिस्टम में फ्यूल चार्ज बाद में जोड़ा गया। इस वजह से बिजली बिल की कुल में अंतर आ रहा है।
सिद्धार्थ यदु, जेई विद्युत वितरण कंपनी टाउन वन