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भगवान श्रीराम ने की थी जनेऊधारी रामेश्वर शिवलिंग की स्थापना

रामायण काल में ताप्ती नदी के तट पर बना था मंदिर

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रामायण काल में ताप्ती नदी के तट पर बना था मंदिर

रामायण काल में ताप्ती नदी के तट पर बना था मंदिर

खेड़ीसावलीगढ़. महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव की उपासना के लिए बैतूल जिले में कई धार्मिक और पौराणिक महत्व के शिवालय मौजूद है, लेकिन पुण्य सलिला मां ताप्ती नदी के तट बारालिंग पर स्थित बारह शिवलिंगों में स्थित जनेऊधारी स्वयम्भू शिवलिंग है, जिसे रामेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। नगर के मनोहर अग्रवाल ने बताया कि यह शिवलिंग रामायण कालीन सबसे प्राचीन शिवलिंग है। पहले यहां मंदिर था, लेकिन ताप्ती नदी के चंदोरा डेम की बाढ़ से वह बह गया, लेकिन शिवलिंग को जरा भी क्षति नहीं पहुंची। शिवलिंग के विषय में बताया जाता है यह मर्यादा भगवान श्रीराम के हाथों स्थापित सबसे पहला शिवलिंग है। उसके बाद ही शेष ग्यारह शिवलिंगों की स्थापना की गई। इस स्थल पर पूजन करने से मौनी फलाहारी बाबा जिनकी वजह से बारालिंग पर है। बाबा ने 50 वर्षों तक मां ताप्ती बारालिंग पर भोलेनाथ की भक्ति की। महाशिवरात्रि पर यहां भोलेनाथ का अभिषेक होता है।
भस्मासुर राक्षस के भय से गुफा में रुके थे भगवान भोलेनाथ
रानीपुर. भोपाली का छोटा महादेव नामक पवित्र पावन तीर्थ स्थल जो कि बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी विकासखंड के रानीपुर ग्राम से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस स्थान पर पहुंचने के लिए देनवा नदी के दर्शन करते हुए पहुंचना पड़ता है। बताया गया कि यहां पर भस्मासुर नामक राक्षस के भय से भगवान भोलेनाथ सतपुड़ा की गुफा में थोड़ी देर रुके थे। ऐसी धार्मिक मान्यता है। भगवान शिव की गुफा में शिवलिंग स्थित है। इसी स्थान से जल का एक स्रोत भी निकलता है जिस के पावन जल के सेवन व सिंचन से रोग दोष नष्ट होते हैं। छोटा महादेव भोपाली में शिवरात्रि में मध्यप्रदेश में महाराष्ट्र से हजारों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। यहां 1500 फीट की ऊंचाई पर एक कुआं है इसमें शिव की जटाए है। भोपाली के छोटे महादेव की आकृति शेषनाग की फनी जैसी दिखाई देती है।