
बैतूल। जिले में पेयजल व्यवस्था को लेकर दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं। एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजनाओं के माध्यम से हर घर तक पानी पहुंचाने के प्रयासों का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ गांव आज भी गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। इससे योजनाओं की जमीनी स्थिति पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
राष्ट्रीय जल महोत्सव के तहत 16 मार्च को पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने ग्राम पंचायत पाठई के अंतर्गत ग्राम निशाना रैय्यत का दौरा कर ग्रामीण नल-जल योजना का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से योजना की प्रगति, जल आपूर्ति की स्थिति और तकनीकी समस्याओं की जानकारी ली। मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए और हर घर तक स्वच्छ एवं नियमित पेयजल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट को समाप्त करना है, ताकि लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े। इसके लिए योजनाओं की लगातार मॉनिटरिंग और समस्याओं का समय पर निराकरण जरूरी है।
दूसरी ओर जिले के ग्राम नायक चारसी में पेयजल संकट की गंभीर स्थिति सामने आई है। यहां के ग्रामीणों ने जनसुनवाई में कलेक्टर को आवेदन देकर बताया कि गांव के ट्यूबवेल और हैंडपंप सूख चुके हैं, जिससे पीने के पानी की भारी समस्या हो गई है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को अपने गांव से 1 से 2 किलोमीटर दूर खेतों से पानी लाकर अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या से न केवल लोगों को बल्कि मवेशियों को भी परेशानी हो रही है। गर्मी की शुरुआत में ही यह स्थिति बन गई है, जिससे आने वाले दिनों में संकट और बढऩे की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द जल व्यवस्था सुधारने और स्थायी समाधान करने की मांग की है।
पीने के पानी की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने मंगलवार को झल्लार क्षेत्र में बैतूल-परतवाड़ा मार्ग पर चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। ग्राम नीमढाना और विजयग्राम के ग्रामीणों ने पानी और जर्जर सडड़ की समस्या को लेकर हाईवे पर बैठकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। करीब दो घंटे तक चले चक्काजाम के कारण मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित रहा और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। झल्लार क्षेत्र का ग्राम नीमढाना लगभग 250 घरों की बस्ती है, जहां लंबे समय से पेयजल संकट बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि पीएचई विभाग द्वारा पानी की व्यवस्था को लेकर केवल दावे किए जा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। गांव में नलजल योजना सुचारू नहीं होने से लोगों को खेतों में स्थित कुओं से पानी लाकर पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। चक्काजाम की सूचना मिलते ही एसडीएम और तहसीलदार सहित प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त किया।
मंगलवार को ट्राइसिकल पर सवार एक दिव्यांग दम्पत्ति अपने छोटे से दिव्यांग बच्चे के साथ पीने के पानी की समस्या लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। गवासेन निवासी ऋषिराज सिवनकर ट्राइसिकल से पत्नी और बच्चों को लेकर जनसुनवाई में पहुंचे थे। दम्पत्ति ने बताया कि उनके मोहल्ले में पानी की भारी किल्लत है। दिव्यांग होने के कारण उनके लिए दूर से पानी लाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। कई बार उन्हें ऊबड़-खाबड़ रास्तों और जोखिम भरे हालातों में पानी ढोना पड़ता है, जिससे गिरने और चोटिल होने का खतरा हमेशा बना रहता है। उन्होंने कहा यदि मोहल्ले में ही पानी की व्यवस्था हो जाए, तो न केवल उनकी समस्या का समाधान होगा, बल्कि उनके जैसे दिव्यांगों के लिए जीवन थोड़ा आसान हो सकेगा।
Published on:
17 Mar 2026 08:59 pm
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