
आस्था के रंग में रंगी पवित्र नगरी, जिसें कहते है नदियों के ननिहालों का मायका
बैतूल। यू तो मध्यप्रदेश को नदियों का मायका कहा जाता है। मध्यप्रदेश में 207 नदियां है। प्रदेश में दो नही नदियों ऐसी है जो पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है। इस जिले में बहने वाली ताप्ती नदी का पुराना इतिहास है। ताप्ती नदी का उदगम स्थल मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में मुल्ताई को माना जाता है। कहा जाता है कि इस स्थान का मूल नाम मूलतापी है जिसका अर्थ है तापी का मूल या तापी माता। हिन्दू मान्यता अनुसार ताप्ती को सूर्य एवं उनकी एक पत्नी छाया की पुत्री माना जाता है। और ये शनि की बहन है। जिसे नदियों का ननिहालों का मायका भी कहते है। थाईलैंड की तापी नदी का नाम भी अगस्त 1915 में भारत की इसी ताप्ती नदी के नाम पर ही रखा गया है। महाभारत, स्कंद पुराण एवं भविष्य पुराण में ताप्ती नदी की महिमा कई स्थानों पर बतायी गई है। ताप्ती नदी का विवाह संवरण नामक राजा के साथ हुुुआ था जो कि वरुण देवता के अवतार थे।
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यह है विशेषता
मुलताई से निकलने वाली ताप्ती नदी पश्चिम मुखी नदी सूर्यपुत्री ताप्ती की मात्र ऐसी नदी है जिसकी कुल लंबाई २५० किलोमीटर है। जो पौने दो हिस्सो में बहती है। इसने नदी के मैदान से लेकर पहाड़ो तक में बनने वाले भवरो की मदद से ड्रील नदी के पत्थरो को चीर कर सुरंग डोह और गहरो गडढ़ोका निर्माण किया है। ताप्ती नदी ने कइ्र्र अधिक गहरे नदी संग्रहणों का निर्माण किया।
यहां पहुंच रहे एक लाख से अधिक श्रृद्वालु
मां ताप्ती जन्मोत्सव पर नगर सहित पूरे क्षेत्र, जिले एवं अन्य प्रदेशों से लगभग एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मुलताई पवित्र नगरी पहुंचकर मां ताप्ती के दर्शन किए। सुबह से ताप्ती तट पर धार्मिक आयोजनों एवं अनुष्ठानों का दौर प्रारंभ हो गया जो रात तक चलता रहा। इस दौरान जहां श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान किया वहीं पूरे दिन पूजा अर्चना की। सुबह मां ताप्ती जन्मोत्सव समिति द्वारा मां ताप्ती का अभिषेक कर ध्वज चढ़ाया गया जिसके बाद ताप्ती तट के सभी मंदिरों में नारियल चढ़ा कर पूजन किया। इसके बाद विशाल चुनरी यात्रा का आयोजन किया गया जिसमें मां ताप्ती सेवा समिति द्वारा 1601 फुट चुनरी मां ताप्ती को अर्पित की गई। चुनरी यात्रा इतनी भव्य थी कि पूरे परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालु चुनरी लेकर चलते हुए नजर आए। दोपहर मां ताप्ती की भव्य शोभायात्रा निकली जिसमें झांकियां, अखाड़ा, तथा ग्रामीण भजन मंडलियों आकर्षण का केन्द्र रही। शाम को ताप्ती सरोवर में दुग्धाभिषेक किया गया जिसके बाद महाआरती संपन्न हुई। पूरे दिन चले कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही तथा सुबह से लेकर रात तक जगह-जगह भंडारों में भी प्रसादी का वितरण चलता रहा।
मां ताप्ती जन्मोत्सव समिति ने ध्वज यात्रा निकाली
मां ताप्ती जन्मोत्सव समिति द्वारा प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी सुबह ध्वज यात्रा निकालकर मां ताप्ती का अभिषेक कर ताप्ती तट के सभी मंदिरों में नारियल भेंट कर पूजन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में नगर के श्रद्धालु ध्वज यात्रा में शामिल हुए। ध्वज यात्रा गाजे-बाजे के साथ धूमधाम से परिक्रमा मार्ग पर निकली जिसमें श्रद्धालु मां ताप्ती के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। जन्मोत्सव समिति द्वारा प्रतिवर्ष मां ताप्ती सरोवर में ध्वजा चढ़ाकर धार्मिक आयोजन एवं अनुष्ठान किए जाते हैं।
दंडवत प्रणाम करते हुए श्रद्धालुओं ने किया परिक्रमा
मां ताप्ती की भक्ति में लीन होकर सुबह युवा श्रद्धालुओं द्वारा मां ताप्ती की दंडवत परिक्रमा की गई। मां ताप्ती से प्रारंभ हुई दंडवत परिक्रमा यात्रा में श्रद्धालु मार्ग पर दंडवत परिक्रमा करते हुए चल रहे थे। इस दौरान श्रद्धालु भक्ति में इतने तल्लीन हो गए थे कि उन्हे मार्ग के पड़े पत्थरों की भी परवाह नही थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां ताप्ती का नाम लेकर जयकारे लगाकर पसीना बहाते हुए कठिन दंडवत परिक्रमा यात्रा पूर्ण की जिनकी श्रद्धा एवं आस्था देखकर लोगों ने दांतो तले उंगलियां दबा ली।
विशाल चुनरी मां ताप्ती को अर्पित की
मां ताप्ती सेवा समिति द्वारा इस वर्ष 1601 फीट की चुनरी मां ताप्ती को अर्पित की गई जिसके पूर्व चुनरी यात्रा धूमधाम से निकाली गई। चुनरी यात्रा में महिला पुरूष श्रद्धालु चुनरी लेकर चल रहे थे। चुनरी इतनी लंबी थी कि पूरे परिक्रमा मार्ग पर चुनरी ही चुनरी नजर आई। समिति के जयकिशन चंदेल ने बताया कि प्रतिवर्ष चुनरी की लंबाई बढ़ती ही जा रही है लोग श्रद्धावश मां ताप्ती को चुनरी अर्पित करते हैं जिसमें बाहर के श्रद्धालुओं द्वारा भी चुनरियां भिजवाई जाती है।
शोभायात्रा में झांकी, अखाड़े देखने उमड़े लोग
मां ताप्ती जन्मोत्सव पर प्रतिवर्ष भव्य शोभायात्रा का आयोजन सभी के द्वारा मिलजुलकर किया जाता है। इस वर्ष दोपहर विशाल शोभायात्रा ताप्ती तट से निकाली गई। गाजे-बाजे एवं डीजे के साथ धूमधाम से निकली शोभायात्रा में देवी देवताओं की झांकी, पर्यावरण बचाने की झांकी सहित अन्य झांकिया आकर्षण का केन्द्र रही। शोभायात्रा में क्षेत्र सहित महाराष्ट्र से भी ग्रामीण भजन मंडलियों ने शानदार प्रदर्शन किया। इस दौरान साहू समाज द्वारा निकाले अखाड़े में हैरत अंगेज प्रदर्शन किए गए।
सुबह से लेकर रात तक चलते रहे भंडारे
जन्मोत्सव पर प्रतिवर्ष भंडारे आयोजन बढ़ते ही जा रहे हैं। सोमवार सुबह से ही ताप्ती तट पर भंडारे प्रारंभ हो गए, सेवाभावी संगठनों सहित जागरूक नागरिकों द्वारा जगह-जगह भंडारे में प्रसादी का वितरण किया गया। दोपहर के बाद नगर में प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाले विशाल भंडारे प्रारंभ हुए। बसस्टेंड पर टैक्सी यूनियन, कंप्यूटर संघटन, अध्यापक संघ, सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ सहित सेवाभावी संगठनों द्वारा प्रसादी का वितरण किया गया। बसस्टेंड पर दोपहर से प्रारंभ हुआ भंडारा रात तक चलता रहा जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।
देवी जागरण में झूमे ताप्ती भक्त
बसस्टेंड पर दोपहर भव्य देवी जागरण का आयोजन किया गया जिसमें जबलपुर, भोपाल सहित महानगरों के प्रख्यात भजन गायक-गायिकाओं ने एक से एक देवी भजनों की प्रस्तुति दी। इस दौरान कलाकारों द्वारा मां ताप्ती के भजन सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कलाकारों द्वारा दोपहर से रात तक लगातार भजनों की प्रस्तुति दी गई जिसे सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। इस दौरान भजनों पर युवा वर्ग द्वारा जमकर नृत्य भी किया गया।
Published on:
09 Jul 2019 12:27 pm
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