8 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

अलाव की गर्माहट में सो गया दर्द, ड्रिप लगी हालत में ठिठुरता रहा मरीज

अलाव के किनारे ही जमीन पर सो गए मरीज और परिजन। बैतूल। मंगलवार रात जब शहर की सडक़ों पर सन्नाटा था और तापमान गिरकर 8.2 डिग्री पर पहुंच चुका था, तब बैतूल जिला अस्पताल परिसर के बाहर इंसानियत को झकझोर देने वाला दृश्य सामने आया। कड़ाके की ठंड से राहत पाने के लिए जल रहे […]

2 min read
Google source verification
betul photo

अलाव के किनारे ही जमीन पर सो गए मरीज और परिजन।

बैतूल। मंगलवार रात जब शहर की सडक़ों पर सन्नाटा था और तापमान गिरकर 8.2 डिग्री पर पहुंच चुका था, तब बैतूल जिला अस्पताल परिसर के बाहर इंसानियत को झकझोर देने वाला दृश्य सामने आया। कड़ाके की ठंड से राहत पाने के लिए जल रहे एक अलाव के पास बैठे मरीजों के परिजन कब थकान के चलते गहरी नींद में चले गए, उन्हें खुद भी पता नहीं चला। अलाव के पास जमीन पर लेटे लोगों में एक मरीज भी था, जिसके हाथ में ड्रिप लगी हुई थी। इलाज के लिए अस्पताल आए इस मरीज के लिए उस रात बिस्तर नहीं, छत नहीं, बल्कि ठंडी जमीन ही सहारा बनी। पास में बैठा उसका परिजन उसे ठंड से ढकने की कोशिश करता रहा, लेकिन अलाव की सीमित गर्माहट कड़ाके की सर्दी के आगे बेबस नजर आई।
मजबूरी ने सुला दिया खुले आसमान के नीचे
रात गहराती गई और ठंड और तीखी होती चली गई। अस्पताल के बाहर अलाव के चारों ओर लेटे परिजन किसी अपने का इलाज चलने की उम्मीद में खुद अपने हालात भूल बैठे। किसी ने सिर को गोद में रखा, तो किसी ने ठंड से बचने के लिए खुद को सिकोड़ लिया। यह दृश्य अस्पताल नहीं, बल्कि किसी सडक़ किनारे ठिठुरते बेसहारा लोगों की तस्वीर जैसा था।
बनी है इमारत, पर बंद है दरवाजे
विडंबना यह है कि जिला अस्पताल के ठीक बगल में मरीजों के परिजनों के ठहरने के लिए लाखों रुपए खर्च कर बनाई गई नई बिल्डिंग आज भी बंद पड़ी है। अगर इसके दरवाजे खुले होते, तो शायद उस रात किसी मरीज को ड्रिप लगी हालत में जमीन पर नहीं सोना पड़ता और न ही उसके परिजनों को अलाव के भरोसे रात गुजारनी पड़ती। अस्पताल प्रशासन ने स्टाफ नहीं होने का हवाला देते हुए नई बिल्डिंग के संचालन से भी हाथ खड़े कर दिए हैं।