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राख बांध पर सर्चिंग करती रही टीम, चकमा देकर छतरपुर के जंगल में पहुंचा टाइगर

शाम के समय बैल पर बोला हमला, चरपवाह बालबाल बचा, मौके पर पहुंचे आलाअफसर

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Tiger-110

Presence of predators in Sanjay Tiger Reserve

सारनी. एक सप्ताह से सारनी रेंज में बाघ की मौजूदगी लगातार बनी है। वन विभाग और एसटीआर की टीम सतत निगरानी कर बाघ को घने जंगल में खदेडऩे का प्रयास कर रही है। इसके लिए दो हाथियों की भी मदद ली जा रही है। लेकिन सफलता नहीं मिली रही। बाघ इतना चालाक है कि कब किस ओर निकल पड़ता है। इसका पता सेंसर सिस्टम ठीक से नहीं लगा पा रहा है। शुक्रवार रात को बाघ की मूवमेंट कंपार्टमेंट 490 के 373 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले राख बांध में थी। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की टीम बाघ की मूवमेंट पर हर समय नजर रखे हुए थी। बावजूद इसके टाइगर ने अलसुबह ऐसा चकमा दिया कि एसटीआर की टीम भी कुछ देर के लिए चौंक गए।

छतरपुर जंगल में जा पहुंचा टाइगर
दरअसल बाघ राख बांध से होते हुए छतरपुर गांव के जंगल में जा पहुंचा। जैसे-तैसे एसटीआर की टीम ने बाघ की मूवमेंट का पता लगाया और छतरपुर-फुलवरिया के जंगल में पहुंची। शाम 5:30 बजे तवा नदी किनारे से पशु चराकर लौट रहे 22 वर्षीय सब्बू सरियाम के बैल पर टाइगर ने हमला बोला। यह दृश्य देख सब्बू घबरा गया और झाडिय़ों में छुप गया। हालांकि बाघ भी बैल का शिकार करने में सफल नहीं हो पाया। यह खबर जंगल की आग की तरह वन विभाग में फैल गई। इसके बाद तो आलाअफसरों का मौके पर पहुंचना शुरू हो गया। वहीं ग्रामीणों को बाघ की मूवमेंट वाले क्षेत्र में जाने से रोक दिया गया। इस मामले में वन विभाग के अधिकारी कुछ भी कहने से साफ बच रहे हैं। लेकिन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि टाइगर फिर सारनी के राख बांध जरुर लौटेगा उनका कहना कि बाघ के सारनी क्षेत्र में फिर लौटने की पूरी संभावना बनी है। उन्होंने बताया कि दरअसल नवंबर-दिसंबर माह में छतरपुर, केरिया, उमरी और फुलवरिया के जंगल में बाघ की लोकेशन मिल रही थी। यहां पशुओं का शिकार भी हुआ था। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि बाघ पुन: सारनी क्षेत्र में लौटेगा।