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बैतूल में मिला यूरेनियम, खोज के लिए बनी टीम

यूरेनियम की खोज अब मप्र के बैतूल जिले में हो सकती है। बैतूल में इसके संकेत मिलने के बाद परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय जिले के 989.076 हेक्टेयर क्षेत्र में इसका पता लगाने जा रहा है।

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Nitesh Tiwari

Sep 12, 2016

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भोपाल/बैतूल. यूरेनियम की खोज अब मप्र के बैतूल जिले में हो सकती है। बैतूल में इसके संकेत मिलने के बाद परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय जिले के 989.076 हेक्टेयर क्षेत्र में इसका पता लगाने जा रहा है।

बताया जा रह है कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व व कॉरिडोर के निकट स्थित ये इलाका पचमढ़ी बायोस्फियर रिजर्व की सीमा से 10 किमी की परिधि में है। इसपे काम को लेकर परमाणु खनिज निदेशालय ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है, जिस पर लगभग सहमति बन गई है। अब फॉरेस्ट क्लियरेंस होने वाला है।

अगर मप्र में यूरेनियम मिलता है तो दुनिया में इस राज्य की पहचान बन जाएगी। मप्र के बैतूल के अलावा छत्तीसगढ़ के सूरजपुर, राजनांदगांव महाराष्ट्र और ओडिशा में भी इसकी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। निदेशालय के प्रस्ताव के बाद बैतूल वन मंडल, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (भू-प्रबंध) और वन बल प्रमुख की ओर से हरी झंडी मिल गई है। जिसके बाद मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेजा गया है। यूरेनियम की खोज वाली जमीन बैतूल का उत्तर वन मंडल का संरक्षित क्षेत्र है। शुरुआत में सर्वे के लिए 10 स्थान चिन्हित किए गए हैं।


यहां भी मिला यूरेनियम
जादूगुडा (झारखंड) में 1967 से खनन हो रहा है। इसके चार किमी दूर भातिन में यूरेनियम की दूसरी खदान है। झारखंड के जादूगुडा में ही 24 किमी दूर तुरामदिन में तीसरी खदान, जहां 2003 में माइनिंग शुरू हुई। नरवापहार में अप्रैल 1995 से माइनिंग शुरू हुई। यह भारत की सबसे आधुनिक यूरेनियम माइंस है। 2014 में भारत में 385 टन यूरेनियम का प्रोडक्शन किया गया, जो दुनिया में इस साल किए गए कुल खनन का मात्र 0.7 प्रतिशत है। वर्ष 2014 में भारत यूरेनियम खनन करने वाले देशों की सूची में 12वें नंबर था।

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