
Just parked on the road.
बैतूल। निजी स्कूलों को धड़ल्ले से मान्यता दी जा रही है,फिर यह भी नहीं देखा जाता है कि स्कूल मापदंड को पूरा करता भी है या नहीं। विभाग के अधिकारी कभी स्कूलों का निरीक्षण करने भी नहीं पहुंचते। स्कूलों को प्रसाद की तरह मान्यता बांट देने से फिर बच्चों को परेशान होना पड़ता है। किराए के भवन में स्कूल संचालित होने से कभी भी विवाद खड़ा हो जाता है और फिर बच्चों को इसका मोहरा बनाया जाता है। ऐसा ही मामला शनिवार कोसमी क्षेत्र में सामने आया है,यहां पर किराए की राशि नहीं देने से भवन मालिक ने स्कूल में ताला जड़ दिया। स्कूल संचालक ने सडक़ जाम कर रोड पर ही स्कूल लगा दिया। सडक़ पर स्कूल लगाने के मामले में डीपीसी ने दो दिन में विधिवत स्कूल संचालन के निर्देश दिए हैं। दोबारा सडक़ पर स्कूल लगाने पर मान्यता रद्द करने और संचालक पर एफआईआर करने की बात कही है।
कोसमी क्षेत्र में तक्षशिला सेवा शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति से तक्षशिला स्कूल संचालित है। स्कूल दो वर्ष से चल रहा है और नर्सरी से लेकर कक्षा दसवी तक स्कूल की मान्यता है। स्कूल भवन के मालिक गुलाबराव लिखितकर ने किराए की राशि नहीं देने पर भवन मेंं ताला लगा दिया। जिसके बाद स्कूल संचालक अनुराग सायरे ने सडक़ के दोनों ओर बसें आड़ी लगाकर स्कूल के सामने ही रास्ता जाम कर सडक़ पर बच्चों को बैठा दिया। सडक़ पर ही स्कूल की शिक्षिकाएं बच्चों को पढ़ाने लगी। कोसमी क्षेत्र में ही उद्योग संचालित करने वाले अखिलेश गोठी ने सडक़ जाम करने पर विरोध जताया है। जिसके बाद सायरे ने बच्चों को बस में बैठाकर पढ़ाई करवाई। स्कूल संचालक सायरे ने बताया कि बिना नोटिस भवन मालिक ने स्कूल मेें ताला लगा दिया है। फरवरी के पहले सप्ताह में बच्चों की परीक्षा होना है,पढ़ाई प्रभावित नहीं हो इसलिए सडक़ और बस में क्लास लगाई है। बच्चों की सुरक्षा के चलते बस को आड़ा लगाया है। उन्होंने बताया कि स्कूल नहीं खुलता तब तक बच्चों की क्लास इसी तरह लगाई जाएगी। तक्षशिला स्कूल में आसपास के लगभग एक दर्जन गांव पाढर, छुरी, साकादेही, डोली आदि गांव से बच्चे पढऩे आते हैं।
पारधी का नंबर बना चर्चा में
भवन मालिक ने स्कूल पर ही अलस्या पारधी का मोबाइल नंबर लिख दिया है। जिस पर लिखा है कि भवन से संबधित जानकारी इस नंबर पर प्राप्त करे। अलस्या पारधी प्रमुख है और उत्कृष्ट स्कूल मैदान में निवासरत हैं। उसका यह नंबर स्कूल भवन पर लिखा जाना चर्चा में बना हुआ है।
किराए का हैं विवाद
स्कूल भवन में ताला लगाए जाने को लेकर भवन मालिक और स्कूल संचालक में किराए को लेकर विवाद है। भवन मालिक का कहना है कि नौ महीने का किराया बाकी है। वही संचालक द्वारा दो माह का किराया बाकी होने की बात कही जा रही है। भवन मालिक और स्कूल संचालक के बीच विवाद में बच्चों को मोहरा बनाया जा रहा है। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं।
फैक्ट फाइल
स्कूल में बच्चों की संख्या- १५०
स्कूल में स्टॉफ-२५
स्कूल भवन का किराया- १५ हजार प्रति माह
स्कूल को मान्यता- १० वी कक्षा तक
स्कूल संचालित- ०२ वर्ष से
गांव से आते हैं विद्यार्थी- १२ लगभग
निजी स्कूल में पूर्व में भी आया मामला
शहर के ही कोठीबाजार स्थित राइजिंग स्कूल में स्कूल संचालक द्वारा शिक्षकों को वेतन का भुगतान नहीं किया था। जिससे शिक्षक स्कूल में नहीं पहुंचे। स्कूल की महिला कर्मचारी ने स्कूल तो खोल दिया,लेकिन पढ़ाने वाला कोई नहीं थी। बच्चे स्कूल पहुंचकर परेशान होते रहे। निजी स्कूल संचालकों की मनमानी की वजह से बच्चों को परेशान होना पड़ रहा है।
इनका कहना
हमने स्कूल संचालक को समझाइश दी है। मकान मालिक और स्कूल संचालक के विवाद में बच्चों को मोहरा नहीं बनाए। बेहतर तरीके से स्कूल का संचालन किया जाए। दोबारा बच्चों को सडक़ पर लाकर बैठाया तो स्कूल की मान्यता रद्द करेंगे। एफआईआर भी कराई जा सकती है। बच्चों को पास के सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाया जाएगा।
अशोक पराडकर डीपीसी बैतूल।
-मकान मालिक का दो महीने का किराया बाकी है। उनके द्वारा नौ महीने का किराए बाकी होने की बात कही जा रही है। स्कूल में बिना सूचना के ताला लगा दिया गया है। बच्चों की परीक्षा होने वाली है। पढ़ाई प्रभावित नहीं हो इसलिए सडक़ पर कक्षाएं लगाई है। भवन मालिक ने और नई शर्तें रख दी है।
अनुराग सायरे, सचिव तक्षशिला सेवा शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति बैतूल।
-स्कूल के लिए भवन किराए पर दिया है। संचालक द्वारा किराया नहीं दिया जा रहा है। जिससे स्कूल भवन में ताला लगाया है। किराया नहीं देने की शिकायत विभाग के अधिकारियों से भी की है।
गुलाबराव लिखितकर, स्कूल भवन मालिक।
Published on:
20 Jan 2018 09:30 pm

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