उद्योग संगठन एसोचैम ने केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक (आरबीआई) को बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्ति पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रियाशील नहीं होने की सलाह दी है। संगठन ने सोमवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरबीआई और सरकार दोनों को ही बुद्धिमत्ता पूर्वक और सावधानी से इस स्थिति से निपटने के लिए कहा है।
एसोचैम के महासचिव डी.एस. रावत ने कहा, 'यह मानना बिल्कुल सही नहीं होगा कि एनपीए के लिए पूरी तरह से कॉर्पोरेट प्रवर्तक जिम्मेदार हैं। हालांकि यह दोषारोपण का समय नहीं है, सच्चाई यह है कि एक समय जब अर्थव्यवस्था आठ-नौ प्रतिशत की गति से विकास कर रही थी, कमोडिटी, रियल इस्टेट, इक्विटी, कच्चा तेल सबका मूल्यांकन बढ़ा चढ़ाकर किया गया और उस समय सबकुछ गलत हो गया। आखिरकार जानी मानी वैश्विक ब्रॉकरेज तथा वित्तीय संस्थाओं ने भी सेंसेक्स के 33 हजार से 35 हजार के स्तर पर पहुंचने की भविष्यवाणी की थी।'
READ:5 साल तक नही बदलेगा कच्चे तेल का वैश्विक स्तर: अंबानीरावत ने कहा कि उस समय कॉर्पोरेट प्रवर्तक परियोजनाओं के विस्तार के लिए अपनी क्षमता से ज्यादा लंबी छलांग लगाई। बैंकों ने भी इनके लिए कर्ज दिया और वे भी इस स्थिति में बराबर के साझीदार हैं। नियामकों ने भी इनसे जुड़े जोखिम की अनदेखी की। विज्ञप्ति में चीन की आर्थिक मंदी का जिक्र करते हुए कहा गया है कि कुछ साल पहले तक जब चीन इस्पात, एल्युमीनियम, कोयला तथा अन्य धातुओं में दुनिया भर में परिसंपत्तियां खरीद रहा था हमें असुरक्षा महसूस हो रही थी।
READ:एयरटेल ने किया 4जी नेटवर्क पर 135एमबीपीएस का दावाअब इन कमोडिटीज के मूल्य घटने से हम राहत महसूस कर रहे हैं कि भारत की सरकारी कंपनियों ने इनमें निवेश की जल्दबाजी नहीं दिखाई। हमें भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहिए। आरबीआई द्वारा एनपीए पर सख्त रुख के बारे में एसोचैम ने कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बैंकों के मूल्यांकन और उनमें लोगों के विश्वास को कोई अपूर्णीय क्षति ना हो। सरकार को सार्वजनिक बैंकों के प्रस्तावित पूंजीकरण की राशि बढ़ानी चाहिए। आखिरकार, यही बैंक लाभांश के रूप में सरकार को मोटी राशि भी देते हैं।