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कृषि को इनोवेशन बनाने वाले ये हैं दुर्ग जिले के किसान रोहित, पूरे देश में धूम मचा रही इनकी उगाई कैंसररोधी ग्रीन राइस, Video

Green rice farming in chhattisgarh दुर्ग जिले के अचानपुर के किसान रोहित साहू की इनोवेश और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों की रिसर्च को अब नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन इंडिया ने भी सराहते हुए ग्रीन राइस को पूरी तरह प्रमाणित कर दिया है।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Dec 10, 2020

कृषि को इनोवेशन बनाने वाले ये हैं दुर्ग जिले के किसान रोहित, पूरे देश में धूम मचा रही इनकी उगाई कैंसररोधी ग्रीन राइस

कृषि को इनोवेशन बनाने वाले ये हैं दुर्ग जिले के किसान रोहित, पूरे देश में धूम मचा रही इनकी उगाई कैंसररोधी ग्रीन राइस,कृषि को इनोवेशन बनाने वाले ये हैं दुर्ग जिले के किसान रोहित, पूरे देश में धूम मचा रही इनकी उगाई कैंसररोधी ग्रीन राइस,कृषि को इनोवेशन बनाने वाले ये हैं दुर्ग जिले के किसान रोहित, पूरे देश में धूम मचा रही इनकी उगाई कैंसररोधी ग्रीन राइस

दाक्षी साहू @भिलाई. ब्लैक, ब्राउन और व्हाइट राइस के बाद इन दिनों पूरे देश में छत्तीसगढ़ की ग्रीन राइस धूम मचा रही है। दुर्ग जिले के अचानपुर के किसान रोहित साहू की इनोवेश और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों की रिसर्च को अब नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन इंडिया ने भी सराहते हुए ग्रीन राइस को पूरी तरह प्रमाणित कर दिया है। खेती-किसानी को जुनून के हद तक जीने वाले मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र के किसान ने न सिर्फ ग्रीन राइस को एक अलग पहचान दिलाई बल्कि इसके बीज संवर्धन के जरिए खेती का रकबा बढ़ाने में भी सहयोग कर रहे हैं। जिसके चलते प्रदेश में चावल की इस नई वैरायटी का पैदावर भी बढऩे लगा है। दुर्ग के अलावा धमतरी और रायपुर जिले के किसान ग्रीन राइस का उत्पादन कर रहे। एक छोटे से गांव से शुरू हुआ हरे चावल का सफर अब भारत के लगभग दस से ज्यादा राज्यों तक भी पहुंच गया है। किसान रोहित ने बताया कि कई लैब और देश के अलग-अलग राज्यों के किसानों की डिमांड पर वे अब तक दस से ज्यादा राज्यों में बीज भेज चुके हैं। महज कुछ एकड़ में शुरू हुई ग्रीन राइस की खेती आने वाले सालों में हजारों एकड़ तक पहुंच सकती है। अपनी औषधीय गुणों के कारण ग्रीन राइस 18 से ज्यादा फूड फेस्टिवल में अवार्ड जीत चुका है।

चार साल तक अपनी इनोवेशन को प्रमाणित करने के लिए जूझते रहा किसान

किसान रोहित साहू ने बताया कि साल 2014 में उन्हें अपने खेत के आधे हिस्से की फसल कुछ अलग लगी। जब उन्होंने धान को कुटाई के बाद देखा तो चावल हरे पन लिए हुआ था। इसकी जानकारी उन्होंने इंदिरा गांधी कृषि विवि. के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा को दी। कृषि वैज्ञानिक ने लैब में जब परीक्षण किया तो सच में चावल का रंग काफी हद तक हरा मिला। जिसके बाद उन्होंने नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन से संपर्क किया। वहां के वैज्ञानिक डॉ. परवेज नौशाद अहमद ने कई दौर की जांच के बाद चावल को टेस्टिंग के लिए हैदराबाद लैब भेजा। चार साल बाद 2018 में लैब ने ग्रीन राइस और इसके औषधीय गुणों को प्रमाणित किया। फिलहाल इस ग्रीन राइस को किसान रोहित ने तिल कस्तूरी नाम से औपचारिक रूप से पंजीकृत करा लिया है। मुनाफा की बजाय धान की देशी किस्मों के बीजों को सरंक्षित करने वाले रोहित कहते हैं कि धान छत्तीसगढ़ की पहचान है। इसलिए वे किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करने मुफ्त में देशी वैरायटी की बीज बांटते हैं।

क्लोरोफिल से मिला है हरा रंग जो है कैंसर रोधी
ग्रीन राइस कस्तूरी प्रजाति का एक चावल है। इस चावल को हरा रंग क्लोरोफिल से मिलता है जो पत्त्तों में पाई जाती है। ग्रीन राइस में क्लोरोफिल के कारण कैंसर रोधक क्षमता पाई जाती है। यह चावल औषधीय गुण के साथ ग्लूटेन रहित है जो वजन घटाने में काफी कारगार साबित होता है। आर्गेनिक पद्धति से उगाए जाने पर यह स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है।

मिला है डॉक्टर खूबचंद बघेल पुरस्कार
कृषि में नए-नए प्रयोग के चलते किसान रोहित साहू दुर्ग जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ में इनोवेटिव फार्मर के रूप में पहचाने जाते हैं। आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने और ग्रीन राइस से परिचय कराने के कारण इन्हें छत्तीसगढ़ का प्रतिष्ठित डॉक्टर खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार भी मिल चुका है। रोहित कहते हैं कि किसानी भी एक लैब की तरह है। अगर आप कोई प्रयोग करोगे तो नतीजे भी बिल्कुल नए मिलेंगे।

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