
बेमेतरा/नवागढ़. लगातार तीसरी बार अकाल की मार व पेयजल निस्तारी संकट के निदान के लिए बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे नवागढ़ विधानसभा सिंचाई व जल संरक्षण के मामले में उपेक्षित है। हाल यह है कि दो वित्तीय वर्ष में बजट में शामिल 22 करोड़ के 8 कार्यों में किसी एक का भी प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिली। स्थिति यह है कि नवागढ़ का पुराना अनुविभागीय कार्यालय तालाबंदी के कगार पर है।
प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिली
वर्ष 2016 -17 में बजट में खम्हरिया, केसला, सोनपुरी एवं भिखमपुर में स्टापडेम कम रपटा निर्माण को बजट में शामिल किया पर प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिली। चालू बजट में नांदल खैरी, भंवरदा, चरगंवा, करमन, मरका, खाम्ही में हाफ नदी में स्टापडेम निर्माण कार्य को शामिल किया गया, पर आज तक इनमें से किसी को भी प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिली। लगभग 22 करोड़ की इस 8 योजनाओं की स्वीकृति समय पर मिलती तो 50 गांव के भूजल स्तर में
सुधार होता।
17 करोड़ अटकाए
एआईबीपी मद से नवागढ़ ब्लॉक को साढ़े १७ करोड़ रुपए दो वर्ष पहले मिले। इस मद के राशि का सही उपयोग के लिए राशि का विभगीय मद में परिवर्तन जरूरी है। यदि मद परिवर्तन होता है, तो प्रतापपुर से जेवरा एन तक हेम्प डायवर्सन का केनाल का सीसी हो जाएगा। जिसमें झांकी, नेवसा, बाधुल, डौकाडीह, नवागढ़, गोपालभैना, रिसाअमली, टूरासेमरिया, तोरा, बरबसपुर, लालबंद, खपरी, नगधा, अंधियारखोर, नांदल, डेवरा देवरी सहित आसपास के गांव के किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा।इस वर्ष कम बारिश में भी इस क्षेत्र के किसानों ने संतोषप्रद उपज इसी संसाधन के भरोसे लिया है। मामला मुख्यमंत्री तक गया पर सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। नवागढ़ में छोईहा नाला सुधार व संरक्षण के लिए बजट में 10 करोड़ का प्रावधान किया गया। इसमें स्वीकृति का विभाग को इंतजार है।
मामूली प्रयास बेहतर परिणाम
निर्माण के 42 वर्षों तक बंकार पड़े सरकारी फेस-टू के केनाल में रिटायर अधिकारी शिवकुमार तिवारी व जल संसाधन विभाग के मामूली प्रयास से पहली बार चंदनू तक पानी पहुंचा। नदी भंसुली, मुलमुला के तालाब में पानी भरकर संकट के निदान का उपाय लोगों ने किया। इधर केम्प डायवर्सन से मोहरंगिया नाला में पानी डालकर मोहरंगिया नाला से लिफ्ट कर नवागढ़ नगर पंचायत क्षेत्र के तालाब लबालब हो गए। भू-जल स्तर में सुधार के साथ बंद पावर पंप चलने लगे। यदि इसी तरह के कार्यों का आंकलन कर बारिश के समय जल संरक्षण के उपाय किए जाएं तो तस्वीर व तकदीर दोनों बदलने में वक्त नहीं लगेगा। सच्चाई यह भी है कि इस गंभीर समस्या के स्थाई समाधान के लिए कोई ठोस प्रयास भी नहीं किए। मांग व घोषणा से आगे यदि कदम बढ़ाया गया होता तो आज किसानों को यह दिन देखना नहीं पड़ता।
स्टीमेट बनाकर भेज दिया
जल संसाधन विभाग बेमेतरा के ईई बीपी सिंह ने बताया कि नवागढ़ ब्लॉक में जल संसाधन विभाग के पास वर्तमान में कोई कार्य नहीं है। 10 करोड़ रुपए के छोईहा नाला के सुधार व संरक्षण के लिए स्टीमेट बनाकर भेज दिया गया है। प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के साथ काम शुरू होगा।
Published on:
18 Nov 2017 03:30 pm

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