
14 साल में पांचवी बार बदला निगम मुख्यालय भवन का प्रस्ताव, 34 करोड़ के बजाय अब 21 करोड़ रुपए खर्च कर बनाएंगे एनर्जी इफिसिएंट बिल्डिंग
भिलाई. नगर पालिक निगम के विभाजन से शहर का विकास अटक गया है। महापौर परिषद की बैठक नहीं हो रही है जिससे विकास कार्यों के प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। नियमत: हर 15 दिन के अंतराल में महापौर परिषद की बैठक होनी है। आयुक्त के वित्तीय अधिकार क्षेत्र से अधिक वाले शहर विकास के प्रस्तावों पर चर्चा कर संकल्प पारित करना होता है। जो प्रस्ताव महापौर परिषद के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है, उसे परिषद की स्वीकृति के साथ कार्य शुरू कराया जाना है। जो प्रस्ताव सामान्य सभा के अधिकार से जुड़ा है ऐसे प्रस्तावों को एमआईसी से संकल्प पारित कर सामान्य सभा के लिए भेजा जाना है, लेकिन भिलाई से अलग कर रिसाली को नया निगम बनाने से महापौर परिषद की वैधानिक व्यवस्था गड़बड़ा गई है। इस वजह से महापौर परिषद की बैठक नहीं हो रही है।
परिषद के दो सदस्यों की पार्षदी शून्य
रिसाली निगम के गठन के बाद महापौर परिषद के दो सदस्य केशव बंछोर और नरेश कोठारी सहित कुल 13 पार्षदों का निर्वाचन शून्य हो गया है। इनके विभाग महिला एवं बाल विकास और शिक्षा खेलकूद एवं युवा कल्याण विभाग के अध्यक्ष का पद रिक्त हो गया है। इस वजह से महापौर को नए सिरे से परिषद का पुनर्गठन करना पड़ेगा।
11 सदस्यों में 14 विभाग का होगा बंटवारा
सत्ताधारी दल के 11 पार्षदों के बीच ही निगम प्रशासन ने मूल 14 विभाग का बंटवारा होगा। चाहे तो महापौर देवेन्द्र यादव अपने दल के नए चेहरे को एमआईसी में जगह दे सकते हैं। या फिर जो 11 सदस्य हैं उनमें ही 14 विभाग का बंटवारा कर विभाग प्रभारी बना सकते हैं।
प्रावधान में 20 फीसद सदस्य
निगम अधिनियम के मुताबिक महापौर परिषद में कुल पार्षदों का 20 फीसद सदस्यों को मिलाकर महापौर परिषद का गठन किया जा सकता है। इस लिहाज से देखा जाए तो भिलाई से 13 वार्डों को अलग कर रिसाली निगम का गठन के बाद कुल 57 वार्ड रह गए हैं। 57 वार्डों का 20 फीसद 11.40 होता है। यानी महापौर परिषद में 11 सदस्य ही होंगे। इससे अधिक सदस्य नहीं हो सकते है।
सालभर से नहीं हुई सामान्य सभा
सालभर से सामान्य सभा नहीं हुई है। चार महीना पहले विशेष बैठक बुलाई गई थी। पहले लोकसभा चुनाव आचार संहिता की वजह से मामला अटका हुआ था। फिर नगरीय निकाय चुनाव की वजह से अटका रहा। अब परिसीमन और रिसाली और भिलाई निगम के बीच बंटवारे की वजह से विकास कार्यों की स्वीकृति का प्रस्ताव अटका हुआ है।
ये हैं निगम के 14 विभाग
विभाग -अध्यक्ष
महिला एवं बाल विकास - नरेश कोठारी
संस्कृति, पर्यटन मनोरंजन एवं विरासत - सूर्यकांत सिन्हा
अग्निशमन एवं यांत्रिकी- जोहन सिन्हा
जल कार्य- सदीरन बानो
नगरीय नियोजन एवं भवन अनुज्ञा- डॉ दिवाकर भारती
शिक्षा एवं खेलकूद युवा कल्याण- केशव बंछोर
एससी, एसटी कल्याण विभाग- सोशन लोगन
वित्त एवं लेखा एवं अंकेशण- दुर्गा साहू
गरीबी उपशमन एवं सामाजिक कल्याण- सुशील देवांगन
सामान्य प्रशासन एवं विधि विधायी- सुभद्रा सिंह
खाद्य,लोक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता- लक्ष्मीपति राजू
राजस्व और लोक कर्म - नीरजपाल
Updated on:
11 Jan 2020 12:03 pm
Published on:
13 Jan 2020 09:02 am
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