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Patrika Interview : डॉ. रजत मूना ने बताया वोटिंग मशीन का अपकमिंग फ्यूचर, ऐसी बातें आई सामने...

locationभिलाईPublished: Nov 24, 2023 07:35:36 am

Submitted by:

Kanakdurga jha

Patrika Interview : शादी होकर ससुराल गई बेटी से लेकर रोजी-रोटी कमाने के लिए दूसरे राज्यों का रुख कर चुके प्रवासियों को अब मतदान करने राज्य वापस लौटने की जरूरत नहीं होगी।

डॉ. रजत मूना ने बताया वोटिंग मशीन का अपकमिंग फ्यूचर
डॉ. रजत मूना ने बताया वोटिंग मशीन का अपकमिंग फ्यूचर
मोहम्मद जावेद

भिलाई। Patrika Interview : शादी होकर ससुराल गई बेटी से लेकर रोजी-रोटी कमाने के लिए दूसरे राज्यों का रुख कर चुके प्रवासियों को अब मतदान करने राज्य वापस लौटने की जरूरत नहीं होगी। वे जहां हैं, वहीं से अपनी विधानसभा या लोकसभा के उम्मीदवार के लिए मतदान कर सकेंगे। मतदान को लेकर यह देश में प्रवासियों के लिए बड़ा तोहफा साबित होगा।
सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कम्प्यूटिंग (सी-डेक) के साथ मिलकर सार्वजनिक उपक्रम ने इसके लिए रिमोट वोटिंग मशीन (आरवीएम) तैयार की है। पत्रिका के साथ हुई एक्सक्लूसिव बातचीत में सीडेक के पूर्व महानिदेशक एवं वर्तमान में आईआईटी गांधीनगर के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. रजत मूना ने वोटिंग मशीन का अपकमिंग फ्यूचर साझा किया। जानिए क्या है नई टेक्नोलॉजी...
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जानिए.... कैसे काम करेगी आरवीएम

ईवीएम की तरह ही आरवीएम में भी इंटरनेट नहीं होगा। वोटिंग की प्रक्रिया चार स्टेप में पूरी होगी। इसके लिए राज्यों में बूथ बना दिए जाएंगे। बूथ पर पीठासीन अधिकारी वोटर की आईडी वेरीफाई करने के बाद उसके मतदाता परिचय पत्र को स्कैन करेंगे। इसके बाद पब्लिक डिस्प्ले यूनिट यानी एक बड़ी स्क्रीन पर वोटर की उस कॉन्सीट्यूंसी का नाम दिखाई देने लगेगा। वोटर अपने पसंद के उम्मीदवार को वोट करेगा और कॉन्सीट्यूंसी नंबर, राज्य कोड और कैंडिडेट नंबर के साथ वोट दर्ज हो जाएगा।
वीवीपैट स्लीप में वोट कोड और कॉन्सीट्यूंसी कोड के साथ ही कैंडिडेट का नाम और सिंबल भी वोटर को दिखाई देगा। आरवीएम लगभग सभी कुछ ईवीएम की तरह ही काम करेगा। आरवीएम की यूनिट में राज्य निर्वाचन क्षेत्र व उम्मीदवार को दिया गया वोट दर्ज हो जाएगा। मतगणना के दौरान आरवीएम मशीन से दिए गए वोट के आंकड़ों को संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के कुल वोटों से जोड़ दिया जाएगा। और इस तरह मतगणना की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
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प्रोटोटाइप का काम पूरा

प्रोफेसर मूना ने बताया कि आरवीएम का प्रोटोटाइप तैयार कर लिया गया है। इसपर आगे की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है। हाल ही में देश की तमाम राष्ट्रीय पार्टियों को आरवीएम का डेमो दिया गया है। हालांकि राजनीतिक दलों ने इसमें फिलहाल रुचि नहीं दिखाई। वहीं अपने स्तर पर कई सारे बिंदु सुझाए। आरवीएम को लेकर उनसे एक तरह का फीडबैक भी लिया गया है। संबंधित विभाग आरवीएम को और भी अधिक प्रभावी बनाने में जुटे हुए हैं। हार्डवेयर से लेकर प्रोग्रामिंग तक सबकुछ देश में ही तैयार हो रहा है।
कब से हो सकेगा लागू

प्रवासी मतदाताओं को आरवीएम की सौगात फिलहाल आगामी लोकसभा चुनाव में तो नहीं मिलेगी। हालांकि आरवीएम को पूरी तरह तैयार करने के बाद यदि राजनीतिक पार्टियां इससे प्रवासियों के मतदान की सहमति देती हैं तो कुछ वर्षों में होने वाले विधानसभा चुनावों में इसका उपयोग जरूर किया जा सकता है। इससे पहले आरवीएम का कई चरणों में टेस्ट एंड ट्रायल की भी जरूरत पड़ेगी। इसमें समय लग सकता है। इसके बाद पूरी प्रक्रिया बनानी होगी, जिसमें पीठासीन अधिकारी से लेकर मतदाता को जोडऩे का क्रम होगा। मतदान के लिए बूथ एवं वोट की पारदर्शिता पर भी काम किया जाना है।
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आखिर, क्यों है जरूरत

2011 की जनगणना के मुताबिक देश में लगभग 45 करोड़ से अधिक लोग प्रवासी थे। इन्होंने अलग-अलग कारणों की वजह से अपना घर छोड़ा। इसमें अधिकतर महिलाएं थीं। जो शादी के बाद दूसरे शहर या राज्यों में बस गईं। 2019 के लोकसभा चुनाव में 67.4 फीसदी वोटिंग हुई थी। चुनाव आयोग के मुताबिक 30 करोड़ मतदाता ऐसे थे, जिन्होंने वोट नहीं दिया। और इसकी सबसे बड़ी वजह प्रवासी ही थे। यदि भविष्य में आरवीएम को मंजूरी मिलती है तो इससे मतदान का प्रतिशत बढ़ाने और प्रवासियों को मतदान से जोडऩे में बड़ी मदद मिलेगी।

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