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पढि़ए दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटियों पर तिरंगा लहराने वाले छत्तीसगढ़ के युवा पर्वतारोहियों की रोमांचक कहानी

हमारे प्रदेश में ऐसे कई युवा हैं जिन्होंने अपने हौसले ओर संघर्ष के दम पर विश्व की बड़ी चोटियों (CG Mountain climber) पर तिरंगा लहराकर प्रदेश का नाम रोशन किया हे। रायगढ़ की रहने वाली याशी जैन यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस पर पहुंच कर तिरंगा फहराकर प्रदेश की पहली महिला पर्वतारोही बन गई हैं। (Bhilai news)

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Aug 10, 2019

yashi jain

पढि़ए दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटियों पर तिरंगा लहराने वाले छत्तीसगढ़ के युवा पर्वतारोहियों की रोमांचक कहानी

भिलाई. पर्वतों की दुनिया वास्तव में एक अलग ही रोमांच दिलाती है। यहां का वातावरण बाहरी दुनिया से बिल्कुल ही अलग होता है। कहीं ठंडी बर्फ की चादरें तो कहीं पर पत्थरों की चट्टानें आपको जिंदगी का असली महत्व से रूबरू कराती हैं। जब आप से दूर से पर्वतों को देखते हैं तो लगता होगा कि यह अंदर से कैसे होंगे। पर्वतों की दुनिया में रहना आज कई लोगों का जुनून बन गया है। हो भी क्यों न यहां का संसार रोमांच और खतरों से भरा होता है। हमारे प्रदेश में ऐसे कई युवा हैं जिन्होंने अपने हौसले ओर संघर्ष के दम पर विश्व की बड़ी चोटियों (Mountain climber) पर तिरंगा (tiranga) लहराकर प्रदेश (Chhattisgarh mountain climber) का नाम रोशन किया हे।

याशी ने फतह की यूरोपी की सबसे ऊंची चोटी
हाल ही में 5 जुलाई को रायगढ़ की रहने वाली याशी जैन यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस पर पहुंच कर तिरंगा फहराकर प्रदेश की पहली महिला पर्वतारोही बन गई हैं। वे बताती हैं कि जब उन्होंने माउंटेनिंग के बारे में डिसाइड किया तो सभी ने मना कर दिया क्योंकि हमारे प्रदेश में किसी महिला ने ऐसा काम नहीं किया था। मुझे हमेशा से ही पर्वतों की दुनिया पसंद है।

बचपन में डिस्कवरी चैनल पर देखती थी तो मुझे शौक होता था कि में भी पर्वतों पर जाऊं। याशी ने 1 जुलाई को अपनी यात्रा शुरू की और महज पांच दिनों में एलब्रुश को फतह कर लिया। गौरतलब है कि एलब्रुश यूरोप की सबसे ऊंची चोटी है जो समुद्र तल से 5642 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां पर याशी ने तिरंगा लहराकर बेटी-बचाओ का संदेश दिया।

अफ्रीका के पर्वत पर लिखा छत्तीसगढ़
दिल में जुनून हो तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं हो सकती। इसी को साबित कर दिखाया था कोरबा के रहने वाले हेमंत गाड़ेश्वर पटेल ने। हेमंत ने 2 मार्च 2018 में अफ्रीका के सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो (समुद्र तल से 5895 मीटर)पर प्रदेश का लोगो लगा तिरंगा लहराकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।

वे बताते हैं कि आर्थिक रूप से कमजोर था मगर लोगों के सहयोग से मैंने अपना सपना जारी रखा। 25 फरवरी को उन्होंने अपनी यात्रा शुरू की थी और 5 दिन में किलिमंजारो को फतह किया। वे बताते हैं कि माउंटेन पर चढऩा रिस्क रहता है क्योंकि आप ऊंचाई पर होते हैं और जरा सर लापरवाही आपकी या आपके साथी की जान ले सकती है।

सपने जैसा है एवरेस्ट (Mount Everest)
अंबिकापुर के रहने वाले राहुल गुप्ता प्रदेश के ऐसे पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने विश्व की सबसे बड़ी चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया है। उन्होंने 14 मई 2018 को सुबह सात बजे एवरेस्ट पर जाकर अपने देश का नाम रोशन किया और एवरेस्ट को फतह करने वाले पहले छत्तीसगढ़ी माउंटेनर बने। वे बताते हैं कि मुझे बचपन से ही पर्वतों की दुनिया अपनी ओर खींचती थी।

मेरा सपना था कि माउंट एवरेस्ट को करीब से देखूं। इसके लिए मैने क्लाइबिंग करना सीखा। जब में एवरेस्ट के लिए सिलेक्ट हुआ तो खुशी भी थी और एक डर भी था। वे बताते हैं कि 22 दिनों की चढ़ाई के बाद वे माउंट एवरेस्ट पर गए। वहां से देखने पर वास्तव में एक अलग ही दुनिया का आभास हुआ। चढ़ाई के दौरान घायल भी हुआ क्योंकि जब आप एवरेस्ट पर चढ़ते हैं तो वहीं 120 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से बर्फीले तूफान का सामना करना पड़ता है। राहुल ने 8 अप्रैल 2018 को नेपाल से अपनी यात्रा शुरू की थी और 14 मई 2018 को एवरेस्ट फतह किया।

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