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विदेशियों को भी भाया कान्हा, उठाई कूंची और भरे रंग

सीखी फड़ कला की बारिकियां

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फड़ कला की बारिकियां सीखेते विदेशी युवा

भीलवाड़ा।
चार यूरोपीय देशों फिनलैण्ड, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, इटली से आए 11 युवक व युवतियों ने शुक्रवार को भीलवाड़ा में कूंची उठाई तथा भगवान विष्णु के अवतार कृष्ण के चित्र में रंग भरे। उन्होंने यहां राजस्थान की लोक चित्रकला 'फड़' की बारीकियों को जाना। आकृति कला संस्थान व 41 गु्रप ऑफ राउण्ड टेबल भीलवाड़ा से भारत एवं यूरोप के बीच यंग एम्बेसेडर प्रोग्राम (वाईएपी) के तहत आए 11 युवक-युवतियों ने शुक्रवार दोपहर वकील कॉलोनी स्थित संस्थान में भीलवाड़ा के चित्रकार लोकेश जोशी से फड़ कला के इतिहास के बारे में जाना।

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विदेशी युवाओं ने फड़ कला के प्रमुख विषयों जैसे बाबा रामदेव, पाबूजी आदि लोकदेवताओं की जीवनी पर आधारित कथाओं को कैनवास पर उतारने की तकनीक के बारे में जानकारी ली। सिटी कोर्डिनेटर सुदीप गलुण्डिया ने बताया कि इस प्रतिनिधिमंडल में सभी 21 वर्ष से कम आयु के थे। इन युवाओं ने भगवान श्रीकृष्ण, मीरां बाई, शेषनाग आदि के चित्रों में रंग भरे। सभी प्रतिभागियों ने एक-एक कलाकृति अपने हाथ से बनाई व फड़ की इस विश्व प्रसिद्ध कला को देख अभिभूत हुए।

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आकृति कला संस्थान के सचिव कैलाश पालिया ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। राउण्ड टेबल की पूजा गलुण्डिया ने भीलवाड़ा की विरासत को बचाए रखने के लिए और अच्छे प्रयास करने की बात कही। कार्यशाला में फिनलैण्ड, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, इटली के प्रतिभागियों सहित भीलवाड़ा की अनुकृति, अनुश्रृति, सपना, काजल, हेमराज मीणा आदि कलाप्रेमी मौजूद थे।

इटली के रिकार्डो हमेशा रखते हैं गीता

भारतीय संस्कृति जानने इटली से आए रिकार्डो श्रीमद्भगवत गीता की पुस्तक हर समय जेब में रखते हैं। उन्होंने भारतीय देवी-देवताओं के बारे में पुस्तकों से ही पढ़ा तथा काफी प्रभावित हुए हैं। वे सबसे अधिक भगवान कृष्ण की लीलाओं से प्रभावित हुए हैं। इन्हें लगता है कि वे कृष्ण जैसा जीवन जीते हैं।

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