4 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आचार्य भिक्षु ने पुर में दो बार किया था चातुर्मास

आचार्य भिक्षु का 219वां चरमोत्सव आज

less than 1 minute read
Google source verification
आचार्य भिक्षु ने पुर में दो बार किया था चातुर्मास

आचार्य भिक्षु ने पुर में दो बार किया था चातुर्मास

भीलवाड़ा .

आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में शनिवार को तेरापंथ के आचार्य भिक्षु का 219वां चरमोत्सव मनाया जाएगा। विसं. 1783 आषाढ़ शुक्ला त्रयोदशी को कंटालिया ग्राम में आचार्य भिक्षु का जन्म हुआ। गृहस्थ अवस्था में 25 वर्ष रहने के बाद उन्होंने संयम पथ स्वीकार करते हुए भाव दीक्षा ग्रहण की। आत्म कल्याण के लिए उद्यत आचार्य भिक्षु ने तत्कालीन समय में व्याप्त आचार संबंधी शिथिलाचार को देखते हुए विसं. 1817 में रामनवमी के दिन बगड़ी ग्राम में अभिनिष्क्रमण किया। आचार्य भिक्षु द्वारा आत्म विजय के लिए किया गया यह प्रस्थान लाखों लोगों को आत्मशुद्धि का पथ दिखाने वाला बन गया।
राजस्थान मेवाड़ से आचार्य भिक्षु का गहरा जुड़ाव रहा है। आचार्य भिक्षु ने अपना प्रथम चातुर्मास केलवा में किया था। केलवा को तेरापंथ की उद्गमस्थली बनने का भी मौका मिला। अपनी यात्रा में आचार्य भिक्षु ने भीलवाड़ा स्थित पुर में दो चातुर्मास विसं. 1847 व 1857 में किया था। भीलवाड़ा भी आचार्य भिक्षु का विचरण क्षेत्र बना। विसं. 1860 में 77 वर्ष की अवस्था में भाद्रपद शुक्ला त्रयोदशी को सिरियारी में आचार्य भिक्षु का महाप्रयाण हुआ। प्रतिवर्ष सिरियारी में इस दिन विराट धम्म जागरणा का आयोजन भी किया जाता है। वर्तमान में आचार्य भिक्षु के ग्यारहवें पट्टधर आचार्य महाश्रमण के चातुर्मास से भीलवाड़ा नगरी धन्य बन रही है।

Story Loader