
Danger of breaking of Nahar Sagar dam in monsoon
Bhilwara Irrigation Department फूलियाकलां क्षेत्र का सबसे बड़ा नाहर सागर बांध के मानसून काल में टूटने का खतरा बना हुआ है। बांध की पाल व पिचिंग में दरारें हो रही और बड़े गडढ़े अनदेखी की पीड़ा बयां कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग को लापरवाही भारी पड़ सकती है। आलम यह है कि बांध के गेट को खोलने का मौका आया तो अफसरों की सांसें फूल सकती है। Bhilwara Irrigation Department
रियासत काल के समय बने बांध की सार संभाल नहीं हाेने से पाल काे खतरा है। पूर्व में भी कई बार बांध की पाल में गल्ला लग चुका है। ग्रामीणों ने इसे लेकर अफसरों को शिकायत की। इसके बाद भी देखरेख में लापरवाही बरती जा रही है। मरम्मत के लिए बजट नहीं मिलने से यह िस्थति बनी हुई है।
पांच हजार हैक्टेयर में सिंचाई
16 फीट भराव क्षमता वाले बांध का केचमेंट एरिया 539 वर्ग किमी है। इससे 4777 हैक्टेयर भूमि सिंचित होती है। बांध के रखरखाव का जिम्मा जल संसाधन विभाग के पास है। पाल की मरम्मत व रखरखाव पर ध्यान नहीं देने से बांध ओवरफ्लो होने पर खतरा हो सकता है। पेटा क्षेत्र में रहने वाले भीमपुरा, डोहरिया व काशीपुरिया के ग्रामीणों को मानसून काल में पाल पर गल्ला लगने का डर रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले भी सरकार ने पैकेज जारी कर बांध का जीर्णोद्धार कराया। एक साल बाद ही पाल जीर्णशीर्ण हो गया। जीर्णोद्धार के बाद बांध की पाल पर भारी वाहनों की आवाजाही व पिछले साल बांध के अंदर अतिक्रमण कर दो कुओं की खुदाई करने से पाल क्षतिग्रस्त हुई है। बांध में पानी आने से यह कुएं डूब चुके हैं।
राहत के लिए बुलानी पड़ी थी सेना
बांध के आसपास अतिक्रमण की भरमार है। पेटा क्षेत्र में अवैध रूप से खेती की जाती है। करीब बाइस साल पूर्व बांध पर चेन संख्या 72 की पाल पर बड़ा गल्ला लगा था। राहत के लिए सेना को बुलाना पड़ा था। जीर्णोद्धार होने पर अधिकारी और जल उपयोक्ता समिति काम की निगरानी करें। ताकि उसकी गुणवत्ता आ सकें।
Published on:
25 Apr 2022 11:13 am
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