- गोबर के कंड़ों की होली की संख्या में हुआ इजाफा - मुहूर्त के अनुसार रात में हुआ होलिका दहन
Bhilwara news : होली पर्व का आगाज गुरुवार को शहर समेत जिले में होलिका दहन के आयोजन के साथ हुआ। शहर में होलिका दहन के प्रति लोगों में खासा उत्साह देखा गया। शहर की विभिन्न कॉलोनियों, बाजार एवं चौराहों पर होलिका दहन के कार्यक्रम ढोल नगाड़े, डीजे व आतिशबाजी के बीच हुए। शहर में 100 से अधिक स्थानों पर होलिका का दहन हुआ। इनमें अधिकांश जगह कांटों के बजाए कंडे से होलिकाओं का दहन किया गया। इस बार भद्रा के कारण देर रात होलिका का दहन हुआ। रात 11.28 बजे से मध्यरात्रि 12.36 बजे तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रहा। इस दौरान जिले में पुलिस बल मुस्तैद रहा। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने भी शांति एवं कानून व्यवस्था पर नजर रखी। शुक्रवार को धुलंडी पर्व पर रंग व गुलाल खेला जाएगा।
भीलवाड़ा शहर के कई स्वयंसेवी व सामाजिक संगठनों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए गोबर के कंडों से निर्मित वैदिक होलिका का दहन किया। इससे पेड़ बचाकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता लाई जा सकें। शहर में करीब 75 से अधिक स्थानों पर माधव गोशाला से तैयार गोबर के कंडों से होलिका तैयार की गई। शहर में इस बार वैदिक होली को लेकर काफी उत्साह रहा। महिलाओं ने होलिका की पूजा-अर्चना की तथा उसे ठंडा किया। अग्रवाल उत्सव भवन में गोबर के कंड़ों से सबसे बड़ी होली का दहन हुआ।
महिलाओं ने लगाए सात चक्कर
होलिका दहन स्थल पर महिलाएं नए वस्त्र पहनकर सामूहिक रूप से आई। महिलाओं ने पूजा कर सूत लपेट कर सात चक्कर लगाकर अपनी मनोकामनाएं मांगी। युवतियों ने गोबर से निर्मित उपलों का प्रयोग किया। लोग होलिका जलने के बाद अग्नि को घर में लेकर गए। होली जलने के साथ सभी ने एक-दूसरे को रंग लगाकर होली पर्व की शुभकामनाएं दी। इससे पूर्व महिलाओं ने होली की पूजा की। होली दहन के दौरान परिक्रमा कर सुख, समृद्धि की कामना की। कई जगह विधि-विधान से शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया गया। शहर की विभिन्न कॉलोनियों में होलिका दहन देखने लोग पहुंचे।
नए धान को सेंक कर लाए घर
परम्परा के अनुसार गेहूं की बालियां जलाई व कुछ ने घर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए होलिका दहन में गेहूं की बालियां सेंक कर अपने घर लेकर आए। पंड़ित अशोक व्यास ने बताया कि होली पूजा की अग्नि में गेंहू की बालियां चढ़ाकर सबसे पहली धान की फसल को भगवान को भेंट करते हैं। होलिका अग्नि में गेंहू की बालियों की आहुति का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि होली की अग्नि में 7 बालियों की आहुति दी जाती है। 7 बालियों के पीछे का अर्थ ये है क्योंकि 7 अंक शुभ माना जाता है। इसलिए सप्ताह में 7 दिन, विवाह में 7 फेरे लेने की परंपरा है। यही वजह है कि होलिका दहन में 7 बालियां होलिका में डाली गई। इसे लेकर बाजारों में बालियां की जमकर खरीदारी हुई। सब्जी मंडी, सूचना केन्द्र चौराहे पर 10-10 बालियां 10 रुपए में बिकी।
रंग व गुलाल की खरीदारी
शहर में रंग व गुलाल की दुकानों पर दिनभर भीड़ रही। शुक्रवार को धुलंडी पर्व को लेकर लोगों ने जमकर रंग व गुलाल की खरीदारी की। शहर व जिले में शुक्रवार को रंगों का पर्व मनाया जाएगा।