भीलवाड़ा

Bhilwara news : प्रदेश के टेक्सटाइल उद्योग को एमपी की तर्ज पर मिले सुविधा, तो बढ़े उद्योग

- पत्रिका की ओर से उठाए मुद्दों को विधायक कोठारी ने विधानसभा में रखा

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Mar 12, 2025
If the textile industry of the state gets facilities on the lines of MP, then the industry will grow

Bhilwara news : टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा में उद्योगों के सामने आ रही समस्याओं को लगातार राजस्थान पत्रिका एक अभियान के तौर पर उठा रहा है। इसी मु्द्दों को लेकर भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने सोमवार को विधानसभा में उठाया। कोठारी ने कहा कि प्रदेश में टेक्सटाइल उद्योग कृषि के बाद सबसे बड़ा रोजगार देना वाला क्षेत्र है। अब टेक्सटाइल उद्योग को मध्यप्रदेश की तर्ज पर सुविधा दी जाए तो यहां के उद्योग मध्यप्रदेश में माइग्रेट नहीं होंगे। राजस्थान में ही रहकर विकास एवं रोजगार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। यहां के काफी टेक्सटाइल उद्योग माइग्रेट होकर नीमच में उद्योग लगा रहे हैं।

कोठारी ने गिनाई पांच समस्या

  • माइग्रेशन का मुख्य कारण मध्यप्रदेश में ब्याज पर अनुदान पांच से छह प्रतिशत है।
  • एमपी में औद्योगिक भूमि की सुगम उपलब्धता है।
  • बिजली की दर मध्यप्रदेश में राजस्थान से दो से तीन रुपए प्रति यूनिट सस्ती है।
  • उद्योग लगाने से सम्बंधित औपचारिकताएं तय समय सीमा में सरकार पूरी करती है।
  • एमपी में 40 से 50 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी है। प्रदेश में केवल 23 प्रतिशत है। यह बहुत ज्यादा गैप है। अगर इसको भीलवाड़ा व राजस्थान में टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देना चाहते हैं तो एमपी की पॉलिसी के आधार पर सुविधा देनी होगी।

औद्योगिक भूमि सबसे महत्वपूर्ण

औद्योगिक इकाइयों की स्थापना में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका औद्योगिक भूमि की उपलब्धता होती है। वर्तमान में भू-उपयोग परिवर्तन के अधिकार दो लाख वर्गमीटर से ज्यादा के राज्य स्तर पर होने से भू-उपयोग परिवर्तन के काफी प्रकरण जयपुर में लम्बित है या देरी से होते है। औद्योगिक इकाइयों की ओर से विस्तारीकरण के आवेदन पर नई भूमि रूपांतरण के लिए आवेदित भूमि में पूर्व में औद्योगिक रूपांतरित भूमि को जोड़ा दिया जाता है। इसके कारण भू-उपयोग परिवर्तन की सीमा को बढ़ाते हुए इसे जिला स्तर पर ही निस्तारण करने के आदेश जारी करने चाहिए।

पीएम मित्रा के अनुसार मिले सुविधा

सरकार ने पिछले बजट में भीलवाड़ा को टेक्सटाइल पार्क रूपाहेली में दिया था। इस भूमि को केंद्र सरकार के पीएम मित्रा पार्क की गाइडलाइन के अनुसार या और भी उससे अधिक सुविधाएं सरकार प्रदान करती है तो ही उद्योगपति उस पार्क से जुड़ पाएंगे। रीको केवल प्लाट का विक्रय कर उद्योगपति को नहीं जोड़ा जा सकता है।

तीन बार एमओयू, फिर भी नहीं लगा स्टील प्लांट

जिंदल सॉ लिमिटेड को वर्ष-2011 में खनिज लीज मिली थी। अब तक कंपनी तीन बार स्टील प्लांट लगाने के लिए सरकार से एमओयू कर चुकी है। लेकिन धरातल पर अभी तक भी कुछ नहीं हो पाया। कम्पनी को अनुबंध के अनुसार माइनिंग लीज के दो वर्ष के भीतर स्टील प्लांट की स्थापना करनी थी। स्थानीय लोगों को रोजगार देना था। कंपनी ने एक भी वायदा पूरा नहीं किया। साथ ही खनन के कारण कई कठिनाइयां आ रही हैं। पुर में मकानों में दरारें आ चुकी हैं। जिंदल अपने सीएसआर फंड में जो राशि का व्यय दिखाया गया वह स्थानीय निकाय को अनुबंध में देय राशि ही है। एक ही राशि को दो जगह उपयोग करना रॉन्ग प्रेक्टिस कहलाता है। कोठारी ने उद्योग मंत्री से कहा कि जिंदल के सभी कमिटमेंट को पूरा करवाने का आग्रह किया।

Published on:
12 Mar 2025 11:13 am
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