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नहीं हुआ सीमांकन, रोज की लड़ाई फिर भी कभी साथ नहीं बैठे

कॉलोनियों में विकास कराने को लेकर तो कभी पट्टे बनाने को लेकर विवाद होता है  

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कॉलोनियों में विकास कराने को लेकर तो कभी पट्टे बनाने को लेकर विवाद होता है

भीलवाड़ा।

शहर में नगर परिषद व नगर विकास न्यास का क्षेत्र तय नहीं है। इसका सीमांकन नहीं होने से रोज विवाद होते हैं। स्थिति यह है कि कभी कॉलोनियों में विकास कराने को लेकर तो कभी पट्टे बनाने को लेकर विवाद होता है। इन दोनों के बीच सीमा विवाद लंबे अर्से से चल रहा है लेकिन निस्तारण नहीं हुआ है। परिषद कई कॉलोनियों में अपना अधिकार मानती है तो न्यास उन्हें अपनी बता खुद राजस्व वसूल रहा है। दोनों संस्थाओं के प्रमुखों की कभी शहर के विकास को लेकर बैठक नहीं होने से कई बातों को लेकर असमंजस बना है।

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इस संबंध में कई बार पार्षदों ने भी मुद्दा उठाया लेकिन अब तक इसका समाधान नहीं हुआ है। परिषद व न्यास का एक ही काम है कि शहर का विकास करना। इसके बावजूद परिषद सभापति ललिता समदानी, न्यास अध्यक्ष गोपाल खंडेलवाल व दोनों संस्थाओं के अधिकारी कभी साथ बैठकर शहर के विकास पर चर्चा नहीं की। यही वजह है कि दोनों के बीच असमंजस है। कई एेसे मुद्दे है जिन पर मिलकर चर्चा करनी है लेकिन इसे कभी किसी ने प्राथमिकता से नहीं लिया।

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कई कॉलोनियों में है राजस्व विवाद
न्यास ने कई कॉलोनियां विकसित कर दी। अब इनको नगर परिषद मांग रही है। परिषद चाहती है कि वे इसकी देखरेख करें और क्षेत्र से राजस्व वसूली करें। अब यूआईटी यह कॉलोनियां हस्तांतरित नहीं कर रही है। इस बात का भी दोनों के बीच विवाद है।

चार माह से अधर में गौरव पथ का कार्य
जहाजपुर. सरकार द्वारा चलाई गई ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में गौरव पथ योजना के तहत जहाजपुर बस स्टैण्ड से लेकर छाबडियां चौराहे तक दो किलोमीटर गौरव पथ स्वीकृत किया गया । गौरव पथ के लिए 2.50 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की गई । उक्त राशि से चाबडियां चौराहे से लेकर उपखण्ड मुख्यालय तक गौरव पथ का निर्माण कर दिया गया ।

उपखण्ड मुख्यालय से लेकर बस स्टैण्ड तक गौरव पथ का कार्य पिछले चार माह से अधर में अटका हुआ है। इस मार्ग पर राजकीय चिकित्सालय, सार्वजनिक निर्माण विभाग, पशुचिकित्सालय, उपखण्ड कार्यालय, तहसील कार्यालय, पंचायत समिति, जलदाय विभाग सहित सभी कार्यालय है। लोगों को गड्ढों से होकर हर दिन गुजरना पड रहा है।


ये रहा विवाद का कारण
इस मार्ग के दोनों ओर सड़क किनारे हाथ ठेला,केबिन संचालक, व थडी संचालक व्यवसाय करते है। इन लोगों ने यथा स्थान अपनी केबिन व हाथ ठेलों को दुबारा से लगाने की मांग की।
समाधान आज तक नहीं हुआ । परिणाम स्वरूप गौरव पथ का कार्य अधर झूल में अटका हुआ है।थडी, केबिन संघर्ष समिति के अध्यक्ष बाबूलाल खटीक ने बताया कि हम विकास में बाधक नहीं है। हमें अन्य स्थान पर जगह देंवे । तहसीलदार ओमप्रकाश जैन ने बताया कि उपखण्ड अधिकारी के आने के बाद ही विचार करेंगे।

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