
शहर में श्वानों का आतंक लोगों का दुश्मन पिछले एक साल में औसतन हर चार घंटे में सात लोग श्वानों के शिकार होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं
भीलवाड़ा।
शहर में श्वानों का आतंक लोगों का दुश्मन बन रहा है। हालात ऐसे हैं कि पिछले एक साल में औसतन हर चार घंटे में सात लोग श्वानों के शिकार होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिले के अस्पतालों में ही 2017 में सालभर में 1806 लोग उपचार के लिए पहुंचे। गंभीर बात यह कि भीलवाड़ा में ही पिछले एक साल में चार की हाइड्रोफोबिया से मौत हो चुकी है। है। इसके बाद भी नगर परिषद अदालतों के आदेश की आड़ में आम लोगों के जीवन और सेहत से खिलवाड़ करने से नहीं चूक रहा। परिषद की लापरवाही शहर के लोगों पर भारी पड़ रही है।
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श्वानों को नहीं पकड़ती नगर परिषद
नगर परिषद की बोर्ड बैठक में शहर में श्वानों के काटने का मुद्दा भी छाया रहा। कुछ पार्षदों ने कहा कि आजादनगर, आरके कॉलोनी, आरसी व्यास कॉलोनी, शास्त्रीनगर में श्वानों का आतंक है। कई लोग शिकार हो चुके। श्वान पकडऩे से परिषद की ओर से कोई विशेष प्रयास नहीं किए जा रहे है।
एक मिमी रोजाना की रफ्तार से बढ़ता है वायरस
श्वान के काटने के बाद उसकी लार में मौजूद वायरस इंसान के रक्त में मिल जाता है। यह वायरस एक मिमी प्रति दिन की रफ्तार से मस्तिष्क की ओर आगे बढ़ता है। इसलिए ही पैर में काटने पर मौत देर से होती है और चेहरे अथवा सीने पर काटने पर वायरस तेजी से मस्तिष्क तक पहुंचता है। एनसेफेलाइटिस होने के बाद मरीज की मौत निश्चित होती है।
खतरनाक है बीमारी
डॉक्टरों ने बताया कि यदि जानवर की लार रक्त या शरीर के अंदर जाती है तो रेबीज का इंजेक्शन लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्वान के काटने से व्यवहार में बदलाव, उत्तेजना, पागलपन, लार गिरना, पानी से डर इसके लक्षण हैं। इसका कोई इलाज नहीं है। सरकारी अस्पतालों में रेबीज के इंजेक्शन निशुल्क लगाए जाते हैं।
गाडिय़ों के पीछे भागते हुए करते हैं जख्मी
मोटर साइकिल सवार लोग इनकी चपेट में सबसे अधिक आते हैं। चलती गाड़ी पर ये किसी का भी पैर पकड़ लेते हैं। कई बार मोटर साइकिल सवार गाड़ी से गिरकर घायल हो जाता है। चौपहिया वाहन के पीछे भी ये दूर तक भागते रहते हैं।
ये हालात पूरे शहर व हाइवे के हैं।
खेलती बच्ची को खींच ले गया, इतना नोंचा कि मौत हुई
शहर के आरसी व्यास कॉलोनी में वर्ष-२०१४ में श्वान ने बालिका की जान ही ले ली। घर के बाहर खेल रही बालिका को श्वान ने नोंच दिया। बालिका चिल्लाई और लोग आए तब तक वह लहूलुहान हो गई थी। उसे एमजीएच ले जाया गया। वहां उसकी बाद में उपचार के दौरान मौत तक हो गई थी।
Published on:
27 Apr 2018 12:43 pm

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